पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल बरी, नन के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध और बलात्कार जैसे लगे थे संगीन आरोप

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कोच्चि. जालंधर के कैथोलिक चर्च के पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल को केरल नन बलात्कार मामले में निचली अदालत ने बरी (Bishop Franco Mulakkal Acquitted) कर दिया है. कोट्टायम के अतिरिक्त जिला न्यायालय के न्यायाधीश जी. गोपाकुमार ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया. 2018 में कैथोलिक चर्च की जीजस मिशनरी से संबंधित वरिष्ठ नन ने जालंधर प्रांत के तत्कालीन बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए कुराविलंगड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करायी थी. उन्होंने कुराविलंगड में मिशन कॉन्वेंट में 2014 से 2016 के बीच करीब 13 बार उनके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप भी लगाया था.

वहीं बिशप ने अपने ऊपर लगाये गये आरोप पूरी तरह से मनगढ़ंत बताते हुए, वरिष्ठ नन के खिलाफ अन्य महिला की शिकायत करने पर, उनके खिलाफ कदम उठाने के एवज में की गई बदले की कार्रवाई बताया था. एफआईआर के दर्ज होने के कुछ वक्त बाद ही सितंबर 2018 में पीड़ित नन के एक करीबी समूह ने मुलक्कल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर केरल उच्च न्यायालय के सामने भूख हड़ताल कर दी. इस विरोध पर सफलता मिली और मुलक्कल को जालंधर से कोच्चि लाया गया, और पुलिस ने तीन दिन तक पूछताछ करने के बाद अंतत: बिशप को गिरफ्तार कर लिया. करीब एक महीने बाद वह जमानत पर छूट गए. इस मामले में 2020 में मुकदमा शुरू हुआ. इस दौरान मुलक्कल ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपने खिलाफ लगे आरोपों को रद्द करने की अर्जी दी,जिसे खारिज कर दिया गया.

मुलक्कल के खिलाफ क्या आरोप लगे
इस पूरे मामले के जांच अधिकारी वैक्कम के डीएसपी के सुभाष थे. मुलक्कल पर अवैध कारावास, सत्ता का दुरुपयोग करके यौन उत्पीड़न, अप्राकृतिक यौन संबंध, बलात्कार और महिला का शील भंग करने जैसे कई गंभीर आरोप लगे. 105 दिनों की लंबी अदालती प्रक्रिया के बाद फैसला आया. मामले की सूची में 83 गवाह थे जिसमें से 39 ने अभियोजन पक्ष के समर्थन में गवाही दी थी. वहीं बचाव पक्ष ने 9 गवाह प्रस्तुत किए थे. गवाहों में सिरो-मालाबार चर्च के मेजर आर्कबिशप जॉर्ज एलेनचेरी, 11 पुजारी, 25 नन, गुप्त गवाही देने वाले सात मजिस्ट्रेट और मेडिकल परीक्षण करने वाले डॉक्टर सहित 4 बिशप शामिल हैं.

क्यों है यह मामला खास
ऐसा पहली बार है जब भारत में किसी कैथोलिक बिशप को यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार किया गया है. मुलक्कल पर जब पुलिस ने बलात्कार के आरोप लगाए उसके बाद तत्काल प्रभाव से उन्हें सेवामुक्त कर दिया गया था. इस मामले के बाद चर्च के भीतर नन पर होने वाले अत्याचार की भयावहता भी सामने आई,शिकायत निवारण के लिए किसी तंत्र की नामौजूदगी की वजह से नन जिसका सामना करती है. आमतौर पर वरिष्ठ पादरियों के खिलाफ शिकायत पर कोई ध्यान नहीं देता है और उच्च प्रबंधन ऐसी शिकायतों को दबा देता है. इस मामले के बाद चर्च के अंदर मौजूद एकतरफा सत्ता पर चर्चा को बढ़ावा मिलेगा और हो सकता है हो सकता है कि इससे कोई संशोधन हो सके.

Tags: Kerala, Rape Case



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