पूर्व सीएम हुड्डा को बड़ा झटका, CBI कोर्ट ने आरोप तय किए-AJL plot allocation case big blow to former CM bhupinder singh Hooda CBI court framed charges hrrm

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भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ी

AJL Case: एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड मामले में अगली सुनवाई 7 मई को होगी. इस दौरान सीबीआई कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज होने का सिलसिला शुरू होगा.

पंचकूला. AJL प्लॉट आवंटन मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) को सीबीआई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. पंचकूला स्थित हरियाणा की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर इस मामले में आरोप तय किए हैं. इस मामले में सीबीआई कोर्ट ने आईपीसी की धारा 420, 120बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत आरोप तय किए हैं. हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और AJL (एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड) प्लॉट आवंटन मामले के मुख्य आरोपी भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर शुक्रवार को आरोप तय होने के बाद अब अगली सुनवाई में मुख्य ट्रायल शुरू होगा. सीबीआई कोर्ट ने AJL प्लॉट आवंटन मामले में आरोप तय कर बड़ा फैसला सुनाया है. बचाव पक्ष द्वारा मामले में लगाई गई डिस्चार्ज याचिका को सीबीआई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. बता दें कि पंचकूला में स्थित हरियाणा की विशेष CBI कोर्ट में AJL प्लॉट आवंटन मामले में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान मामले के मुख्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कोर्ट में पेश हुए. अब मामले में अगली सुनवाई 7 मई को होगी. 7 मई को होने वाली सुनवाई के दौरान सीबीआई कोर्ट में गवाहों के बयान दर्ज होने का सिलसिला शुरू होगा. बता दें कि AJL प्लॉट आवंटन मामले के दूसरे मुख्य आरोपी रहे एजेएल हाउस के चेयरमैन मोती लाल वोरा की मौत हो चुकी है. ये है मामलागौरतलब है कि 24 अगस्त 1982 को तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री भजनलाल ने नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन करने वाली कंपनी एसोसिएट्स जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के हिंदी अखबार नवजीवन को पंचकूला सेक्टर 6 में 3360 वर्गमीटर का प्लॉट (नंबर सी-17) अलॉट किया था. कंपनी को इस पर 6 माह में निर्माण शुरू करके दो साल में काम पूरा करना था, लेकिन वह 10 साल में भी ऐसा नहीं कर पाई. इसके बाद 30 अक्टूबर 1992 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण यानि हुडा ने आवंटन को रद्द कर दिया था. इसके बाद 18 अगस्त 1995 को नए आवंटन के लिए आवेदन मांगे गए. इसमें एजेएल कंपनी को भी आवेदन करने की छूट दी गई. इसी दौरान 14 मार्च 1998 को एजेएल की ओर से आबिद हुसैन ने हुडा के चेयरमैन को पूर्व प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की अपील की. 14 मई 2005 को हुडा के चेयरमैन ने अफसरों को एजेएल कंपनी के प्लॉट अलॉटमेंट की बहाली की संभावनाएं तलाशने को कहा, लेकिन कानून विभाग ने अलॉटमेंट बहाली के लिए साफ तौर पर इनकार कर दिया.



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