प्याज की खेती से किसान हुए मालामाल, 38 हजार रुपये लगाकर कर सकते हैं लाखों की कमाई

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नई दिल्ली. कहते हैं कि सच्ची लगन और मेहनत से इंसान किसी भी मुकाम तक पहुंच सकता है…ऐसा ही कुछ ग्राम देवलखेड़ी, जिला भोपाल के प्रगतिशील युवा किसान विनोद कुशवाह ने साबित कर दिखाया है. ये प्याज की उन्नत खेती करके अच्छी आमदनी कर रहे हैं. इन्होंने न्यूज 18 अन्नदाता की टीम से खास बातचीत में बताया कि वह इस समय एक एकड़ क्षेत्र पर प्याज की खेती कर रहे हैं और इस फसल से उन्हें औसत उत्पादन 40 क्विंटल प्राप्त हुआ. इसका बाजार में औसतन मूल्य 3,500 रुपये प्रति क्विंटल मिला. इस तरह उनकी कुल आमदनी 1,40,000 रुपये हुई. जबकि इसे उगाने पर उनका कुल खर्च करीब 38,700 रुपये आया. इस लिहाज से उन्हें 1,02,300 रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ.

विनोद कुशवाह बताते हैं कि अच्छा मुनाफा कमाने के लिए फसल का प्रबंधन सही ढंग से करना जरूरी है. सबसे पहले इसकी खेती के लिए 10 X10 आकार की क्यारियां बनानी होंगी. इसके बाद एक एकड़ क्षेत्र में बुवाई के लिए 5 किलोग्राम बीज का इस्तेमाल किया. वे बीजों को बुवाई से पहले फफूंदनाशक दवा से उपचारित कर लेते हैं. इसके बाद ही क्यारियों में बीजों की बुवाई करते हैं. इस तरह 30 से 35 दिनों में पौध रोपाई योग्य तैयार हो गई.

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उसके बाद तैयार पौध की रोपाई के लिए समतल और अच्छी जल निकास वाली भूमि का चयन किया और भूमि की तैयारी के समय एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से और 2 जुताइयां कल्टीवेटर से करके पाटा लगाकर खेत को भुरभुरा व समतल किया. बाद में उसमें संतुलित पोषक तत्वों का प्रयोग किया.

इसके बाद तैयार खेत में पौध की रोपाई कर दी और ट्यूबवेल द्वारा फसल में नियमित अंतराल पर सिंचाई करते रहते हैं. फसल में खरपतवारों के नियंत्रण के लिए मजदूरों द्वारा निराई-गुड़ाई करवा देते हैं. जिससे फसल खरपतवार मुक्त हो जाती है.

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इसके बाद 50 किलोग्राम यूरिया, 50 किलोग्राम डीएपी, 20 किलोग्राम सल्फर और 20 किलोग्राम जिंक प्रति एकड़ प्रयोग में लाते हैं. फसल को कीट और रोगों से बचाने के लिए उचित कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करते हैं. इस तरह इनकी फसल रोपाई से 2.5 से 3 महीने में खुदाई के लिए तैयार हो जाती है.

इसके बाद यह मजदूरों द्वारा खुदाई होती है और फिर उसे सूखने के लिए खेत में ही छोड़ देते हैं. इसके 10 से 15 दिन बाद प्याज के डंठलों की कटाई करते हैं फिर ग्रेडिंग करके जालीदार बोरियों में भरकर बाजार में भेज देते हैं

(अनुग्रह तिवारी, अन्नदाता, न्यूज18 इंडिया)

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