बंगाल में TMC की प्रचंड जीत के बाद क्या PK देश में मोदी विरोधी फ्रंट की अगुवाई करेंगे?

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पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी की जीत के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं.

West Bengal Assembly Election Result 2021: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजे आने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) का कद राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ जाएगा. अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव और साल 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्या विपक्षी दलों के लिए एक मात्र आशा का किरण PK पर आ कर टिक गई है?

नई दिल्‍ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election Result 2021) में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी टीएमसी (TMC) ने इस चुनाव में 210 से अधिक सीटें या तो जीत गई हैं या उस पर आगे चल रही हैं. ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाले प्रशांत किशोर का कहना है कि वह अब चुनावी रणनीतिकार का काम नहीं करेंगे. बता दें कि कुछ महीने पहले ही प्रशांत किशोर ने अपने एक ट्वीट में कहा था कि अगर बीजेपी बंगाल चुनाव में तिहाई का आंकड़ा पार कर लिया तो वह चुनावी रणनीति बनाने का काम छोड़ देंगे. हालांकि, प्रशांत किशोर की कही बात अब सच साबित हो गई है. बीजेपी दहाई तक ही सिमट कर रह जाएगा. इसके बाद भी प्रशांत किशोर ने रणनीतिकार का काम क्यों छोड़ने का ऐलान किया है? क्या प्रशांत किशोर का कद राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ने जा रहा है? अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव हो या साल 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्षी दलों के लिए एक मात्र आशा का किरण प्रशांत किशोर ही हैं? प्रशांत किशोर अब क्यों होने जा रहे हैं खास बता दें कि 21 दिसंबर 2020 को प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर एक ट्वीट किया था. इस ट्वीट में उन्‍होंने लिखा था कि बीजेपी बंगाल में डबल डिजिट पार करने में भी जद्दोजहद करेगी. अगर वो बेहतर प्रदर्शन करती है तो मैं यह स्‍थान खाली कर दूंगा. हालांकि, रविवार को प्रशांत किशोर ने कहा कि वह अब चुनावी रणनीति बनाने का काम नहीं करेंगे. किशोर ने कहा, ‘मैं जो कर रहा हूं, अब मैं वो काम नहीं करना चाहता. मैंने बहुत कुछ किया है. अब मेरे लिए थोड़ा आराम करने का वक्‍त आ गया है और जीवन में कुछ और काम करने का भी. मैं अब यह जगह खाली करना चाहता हूं. मेरे पीछे भी एक टीम है जो काम करती है और क्रेडिट मुझे मिलता है. ऐसे में अब वह टीम आगे का काम करेगी.’

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प्रशांत किशोर ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम किया था.

इन लोगों और पार्टियों के लिए बना चुके हैं रणनीति गौरतलब है कि प्रशांत किशोर ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में गुजरात के तात्कालीन मुख्यमंत्री और अभी के पीएम नरेंद्र मोदी के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम किया था. बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत हासिल की थी. प्रशांत किशोर का नाम तब सभी लोगों के जुबान पर आया था. बाद में कहा गया कि अमित शाह के मतभेद के बाद उन्होंने बीजेपी के लिए काम करना छोड़ दिया. कुछ समय के बाद वह जेडीयू में शामिल हो गए थे. हालांकि, बाद में उन्होंने जेडीयू से भी नाता तोड़ कर फिर से अपने पुराने काम में हाथ आजमाना शुरू कर दिया था. साल 2020 में बीजेपी को पहला झटका दे चुके हैं
प्रशांत किशोर ने बीजेपी से अलग हो कर साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू-आरजेडी गठबंधन के लिए रणनीति बना कर इस गठबंधन को सत्ता तक पहुंचाई थी. इसी तरह 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी के लिए रणनीति बना कर कैप्टन अमरिंदर सिंह को सत्ता की दहलीज पर पहुंचाया. कुछ दिन पहले ही अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर से 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए किशोर को अपना रणनीतिकार बनाया है.

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बंगाल में कांग्रेस की हार एग्जिट पोल में दिखाई गई है. (File pic)

नॉर्थ से साउथ हर जगह रणनीति बनाने में माहिर हैं PK 2019 के आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के लिए रणनीति बना कर जगनमोहन रेड्डी को सीएम की कुर्सी तक भी पहुंचाया. इसी तरह 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने किशोर को दिल्ली का जिम्मा दिया था. 2020 में भी प्रशांत किशोर ने 70 में 62 सीट जीता कर अरविंद केजरीवाल को तीसरी बार मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया. इसी तरह 2021 विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर तमिलनाडु में डीएमके और पं बंगाल में टीएमसी के लिए काम किया और नतीजा दोनों पार्टियों की जीत के रूप में सामने आया है. ये भी पढ़ें: मुस्लिम, मतुआ, महिला और ममता- बंगाल चुनाव में टीएमसी के शानदार प्रदर्शन के ये हैं अहम फैक्टर 2024 में मोदी विरोधियों के लिए एकमात्र आस? कुलमिलाकर प्रशांत किशोर हाल के वर्षों में विपक्षी दलों के लिए उम्मीद की किरण के रूप में उभरे हैं, जो बीजेपी के चुनावी रणनीति को बेहतर तरीके से जवाब दे रहे हैं. प्रशांत किशोर का यह हुनर अब विपक्षी दलों को रास आने लागा है. विपक्ष में बैठे कई नेताओं को लगता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव और आने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में प्रशांत किशोर की रणनीति से बीजेपी को पटखनी दी जा सकती है. इसलिए अब इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोदी विरोधी फ्रंट या दलों के लिए प्रशांत किशोर का सहयोग लेना ही अब एकमात्र विकल्प हो सकता है.



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