बीएल शेरवाल ने बताया – वैक्सीन की डबल कवर सुरक्षा के लिए ली जा रही पुलिस की मदद

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वैक्सीन की सुरक्षा के पूरे उपाय किए जा रहे हैं. (प्रतीकात्मक चित्र)

राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर बीएल शेरवाल ने बताया कि वैक्सीन स्टोरेज की सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं. क्योंकि इसके लिए इंटरनल सिक्योरिटी बेहद जरूरी है. डबल कवर के लिए पुलिस की भी मदद ली जा रही है.

दिल्ली. वैक्सीन स्टोर करने के लिए राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भंडारण केंद्र यानी कि स्टोरेज की तैयारियां शुरू कर दी गई है. राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर बीएल शेरवाल ने बताया कोविड-19 के लिए हर आदमी बेसब्री से इंतजार कर रहा है. उम्मीद की जा रही है कि नए साल के शुरुआत में हम वैक्सीन लगाना शुरू कर देंगे.

वैक्सीन नहीं, गोल्ड

बीएल शेरवाल ने बताया कि वैक्सीन स्टोरेज की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं. क्योंकि इसके लिए इंटरनल सिक्योरिटी बेहद जरूरी है. डबल कवर के लिए पुलिस की भी मदद ली जा रही है. आज के समय में वैक्सीन जब आएगी तो वह वैक्सीन नहीं बल्कि एक तरीके से वह गोल्ड (सोना) है क्योंकि यह वैक्सीन प्राइस लेस है. इसीलिए उसकी हिफाजत करना हमारे लिए बेहद जरूरी है.

90 डीप फ्रीजर लगाए जा रहेदिल्ली सरकार द्वारा वैक्सीन स्टोरेज के लिए राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में व्यवस्था की गई है, जहां तैयारियां तेजी से की जा रही है. केंद्र सरकार की तरफ से वैक्सीन को सुरक्षित करने के लिए जितने भी इक्विपमेंट हैं, वे सभी यहां पर आ चुके हैं. 90 के करीब डीप फ्रीजर वैक्सीन सुरक्षित करने के लिए लगाए जा रहे हैं. 74 से 80 लाख यूनिट डोज यहां पर सुरक्षित रखी जा सकेंगी.

हर व्यक्ति को दो डोज

डॉक्टर शेरवाल ने बताया कि प्रति व्यक्ति दो डोज लगाई जाएंगी. सबसे पहले स्वास्थ्य कर्मियों को, उसके बाद फ्रंट लाइन पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों, मीडियाकर्मियों को वैक्सीन लगाई जाएगी. फिर 50 साल से ज्यादा उम्रवाले जो लोग हैं, उनलोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी. भारत सरकार का जो प्रोटोकोल है उसे फॉलो किया जाएगा. सरकार की तरफ से फील्ड वर्कर्स को ट्रेनिंग दी जा रही है. लोगों का और पेशेंट का डेटाबेस रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा. इसके साथ ही हर डोज की ट्रैकिंग होगी.

कोल्ड चेन बेहद अहम

डॉक्टर शेरवाल ने बताया कि वैक्सीन के अंदर कोल्ड चेन बेहद महत्वपूर्ण है. कोल्ड चेन कहीं भी ब्रेक होती है तो उसका भी रिकॉर्ड रखा जाएगा. इसके साथ ही वैक्सीन की सेफ्टी के लिए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी भी लगाए गए हैं. हर एक व्यक्ति जिसे वैक्सीन लगेगी उसकी पूरी ट्रैकिंग की जाएगी. शुरुआत में उसे ऑब्जर्व भी किया जाएगा कि वैक्सीन किस तरीके से काम कर रही है. ताकि यह देखा जा सके कि पेशेंट को किसी तरीके की कोई समस्या तो नहीं हो रही है, कोई साइड इफेक्ट तो नहीं दिख रहा है.


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