बेगम हजरत महल: 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के छुड़ा दिए थे छक्के, अवध को कराया था मुक्त

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हाइलाइट्स

बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों को आजादी की पहली लड़ाई में अवध से खदेड़ दिया था.
बेगम हजरत महल ने अपने पति के अपमान का बदला लेने के लिए 1857 की क्रांति का आगाज किया था.

अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. बेगम हजरत महल एक ऐसी वीरांगना थीं, जिन्‍होंने अंग्रेजों को आजादी की पहली लड़ाई में अवध से खदेड़ दिया था. उनका का जन्म 1820 में फैजाबाद में हुआ था. बेगम हजरत महल ने परीखाना संगीत स्कूल से संगीत की शिक्षा ली थी. उनके पिता अंबर अफ्रीकी गुलाम थे. बेगम हजरत महल की खूबसूरती और कला को देखकर वाजिद अली शाह ने उनसे निकाह कर लिया था.1845 में बेगम हजरत महल ने एक बेटे को जन्म दिया था जिसका नाम बिरजिस कद्र था.

वहीं, 1850 में अंग्रेजों ने जब अवध पर कब्जा कर लिया था तब वाजिद अली शाह, जो कि अवध के नवाब थे उनको भागने पर मजबूर कर दिया था. नवाब वाजिद अली शाह ने अवध छोड़कर जाने से पहले बेगम हजरत महल को तलाक दे दिया था और कोलकाता चले गए थे.

बेगम ने लिया पति के अपमान का बदला
ऐसे में बेगम हजरत महल ने अपने पति के अपमान का बदला लेने के लिए 1857 की क्रांति का आगाज किया था. इस क्रांति में उन्होंने सभी अंग्रेजों को रेजीडेंसी में करीब तीन महीने तक क्रांतिकारियों के साथ मिलकर घेर रखा था. इस दौरान अंग्रेजों और बेगम के सैनिकों के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें बड़ी संख्या में अंग्रेज मारे गए थे. तीन महीने तक रेजीडेंसी में ही सभी अंग्रेज छिपे रहे थे. अंग्रेजों की सेना के प्रमुख हेनरी लॉरेंस को भी उन्होंने मार गिराया था. तीन महीने तक घेराबंदी के बाद रेजीडेंसी पर जीत बेगम हजरत महल और क्रांतिकारियों ने कर ली थी. इसके बाद उन्‍होंने अपने बेटे बिरजिस कद्र को अवध का नया शासक घोषित कर दिया था. हालांकि उनके बेटे नाबालिग थे तो ऐसे में सारी जिम्मेदारी उन पर ही थी.

नेपाल में ली अंतिम सांस
एक साल बाद अंग्रेजों ने फिर से अवध पर कब्जा करने के लिए हमला कर दिया था और इस बार बेगम हजरत महल कैसरबाग को बचाने में असफल हो गई थीं. उन्होंने कैसरबाग से निकलकर मूसाबाग को अपना नया ठिकाना बनाया था. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ यहीं से लड़ाई लड़ी, लेकिन इस बार वह समझ गई थीं कि जीतना मुश्किल है क्योंकि उनके कई सैनिक मार डाले गए थे. ऐसे में वह अपने सैनिकों के साथ नेपाल चली गई थीं और वहीं पर उन्होंने रहना शुरू कर दिया था. बताया जाता है कि उन्होंने कई बार भारत आने की बात कही, लेकिन अंग्रेजों ने आने नहीं दिया.अंग्रेजों ने बेगम को पेंशन देने की बात कही थी, तो उन्‍होंने मना कर दिया था. इसके बाद बेगम हजरत महल ने नेपाल में अपनी अंतिम सांस ली और नेपाल में उनको दफना दिया गया.

Tags: 1857 Kranti, Independence day, Lucknow news



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