बेटे की चाह में पेट के बल लेटती हैं महिलाएं, ऊपर से गुजरते हुए मंदिर पहुंचते हैं बैगा

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रायपुर. छत्तीसगढ़ के धमतरी में एक विचित्र पंरपरा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दीपावली (Deepawali) के बाद मां अंगारमोती मंदिर में 20 नवंबर से लगे मड़ई मेले (Madhai Mela) का आयोजन हुआ. इस मेले के साथ यहां के लोग आस्था के नाम पर एक प्रथा निभाते हैं. संतान प्रप्ति खासकर बेटे पैदा करने के लिए महिलाएं पेट के बल लेटती हैं और बैगा (जनजाति) उनके ऊपर से होकर गुजरते हैं. इसे परण कहा जाता है.

मान्यता है कि ऐसा करने से महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है. इस साल भी 200 से अधिक महिलाएं नींबू, नारियल और अन्य पूजा सामाग्री लेकर खुले बाल लेकर पेट के बल लेटी रहीं. 10 से ज्यादा बैगा अपने डांग-डोरी के साथ महिलाओं के ऊपर चलते हुए मां के दरबार पहुंचे.

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स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि ये प्रथा 500 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है. स्थानीय लोगों में इस परंपरा की शक्ति को लेकर अटूट विश्वास भी है. उन्होंने यह भी दावा किया कि कई महिलाओं ने मेले में भाग लेने के बाद पुत्र प्राप्ति की बात भी कही है.

जिला मुख्यालय से 14 किमी दूर गंगरेल बांध के किनारे मां अंगारमोती विराजित हैं. जहां मड़ई मेला लगता है. यहां अलग-अलग गांवों से लोग आते हैं और माता की पूजा होती है. दीपावली के बाद जो पहला शुक्रवार आता है उसी दिन यहां मड़ई होती है. फिर अंचल के अन्य गांवों में मड़ई मेले के आयोजन शुरू होता है.इस वीडियो पर लोगों के तरह-तरह के रिएक्शन आ रहे हैं. कुछ ट्विटर यूजर इस वीडियो को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला बता रहे हैं. देखिए, कुछ ऐसे ही रिएक्शन…

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बता दें कि पहले कोरोना संक्रमण के चलते गंगरेल मड़ई के आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी. जिसके बाद मां अंगार मोती मंदिर ट्रस्ट ने बैठक कर इस वर्ष भी गंगरेल मड़ई आयोजित करने का निर्णय लिया. प्रशासन की अनुमति के बाद ही इसका आयोजन किया गया. यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार मास्क के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पूजा करनी पड़ी.



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