बेटे के शव को कंधे पर ढोने का मामला; सुनवाई में CMO नदारद, भड़के मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष

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हाइलाइट्स

10 साल का मासूम बिजली के पोल में करंट उतरने से झुलस गया था.
शव ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन या एंबुलेंस नहीं मुहैया कराया.

इलाहाबाद. संगम नगरी प्रयागराज में बेटे की मौत के बाद शव वाहन या एम्बुलेंस न मिलने के बाद मजबूर पिता कंधे पर बेटे के शव को लेकर कई किलोमीटर तक चले थे. इस मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसपी सिंह और सीएमओ डॉक्टर नानक सरन को तलब किया था. यूपी मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बी. के. नारायण ने सोमवार को मामले की सुनवाई की.

सुनवाई के दौरान मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर एस.पी. सिंह पेश हुए और पूरे मामले से आयोग को अवगत कराया. वहीं, सीएमओ डॉ. नानक सरन ने प्रतिनिधि के जरिए अपना जवाब दाखिल किया. मानवाधिकार आयोग ने सीएमओ के पेश न होने पर कड़ी नाराजगी जताई. आयोग ने 24 अगस्त को फिर से दोनों अधिकारियों को तलब किया है. सुनवाई की अगली तारीख पर मृतक बच्चे के पिता बजरंगी यादव भी शामिल हो सकते हैं.

करंट लगने से हुई थी मासूम की मौत
गौरतलब है कि करछना के डीहा गांव के रहने वाले बजरंगी यादव का 10 साल का मासूम बेटा शुभम बिजली के पोल में करंट उतरने से झुलस गया था. जिसे इलाज के लिए एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. पोस्टमार्टम के बाद कर्मचारियों ने शव परिजनों को सौंप दिया था. लेकिन बजरंगी यादव को बेटे का शव ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से शव वाहन या एंबुलेंस नहीं मुहैया कराया गया.

इसके बाद मजबूर होकर बजरंगी यादव दो अगस्त को बच्चे का शव कंधे पर लेकर कई किलोमीटर तक पैदल ही चला था. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और मीडिया में खबर दिखाए जाने के बाद यूपी मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया था.

हाइकोर्ट अधिकवक्ता मदद के लिए तैयार
इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता विजय श्रीवास्तव का कहना है कि यूपी मानवाधिकार आयोग ने मानवता को शर्मसार करने वाली इस मामले पर संज्ञान लेकर अच्छी पहल की है. उम्मीद है कि अगली सुनवाई पर आयोग कोई सख्त आदेश पारित करेगा. उन्होंने कहा है कि मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बी. के. नारायण से अधिवक्ता यह मांग करेंगे कि अस्पतालों में शव वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए. ताकि गरीबों को निःशुल्क शव वाहन की सुविधा मिल सके. उन्होंने कहा है कि अगर पीड़ित पिता बजरंगी यादव को किसी कानूनी मदद की आवश्यकता होगी या इस मामले में हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करनी होगी तो अधिवक्ताओं की टीम उनकी मदद भी करेगी.

गौरतलब है कि इस मामले में बिजली विभाग के तीन अधिकारियों को लापरवाही बरतने पर सस्पेंड किया गया है. इसके साथ ही एक संविदा लाइनमैन की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं. इस मामले में करछना थाने के इंस्पेक्टर टीकाराम को भी लापरवाही बरतने पर सस्पेंड किया गया है.

Tags: Allahabad news, Human Rights Commission



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