भाजपा और जेडीयू का कांग्रेस पर तंज, कहा- इस पार्टी का संगठन, नेतृत्व और विचारधारा तीनों लुप्त हो चुके

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सिर्फ साइन बोर्ड पार्टी बनकर रह गई है कांग्रेस: भाजपा

Bihar Congress News: बिहार के प्रभारी पद से शक्ति सिंह गोहिल (Shakti singh Gohil) के मुक्‍त होने के बाद कांग्रेस के 11 विधायकों के एनडीए जानें के दावे ने हंगामा खड़ा कर दिया है. इस बीच भाजपा सांसद राकेश सिंहा (Rakesh Sinha) ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ एक साइन बोर्ड पार्टी बनकर रह गई है.

पटना/नई दिल्‍ली. बिहार में कांग्रेस (Bihar Congress) के भीतर हलचल तेज है. एक तरफ जहां कांग्रेस में टूट की चर्चाओं का बाजार गर्म है, तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में बदलाव की शुरुआत भी दिखने लगी है. शुरुआत पार्टी के प्रभारी के स्तर पर हुई है. कांग्रेस के बिहार के प्रभारी पद पर अब शक्ति सिंह गोहिल (Shakti singh Gohil) की जगह भक्त चरण दास आ गए हैं, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त पार्टी के राज्य प्रभारी रहे गोहिल की बिहार के दायित्व से मुक्त होने की इच्छा ने सियासत गरमा दी है. यही नहीं, भाजपा और जेडीयू ने भी कांग्रेस पर तंज कसा है.

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन और उसके संगठन के हालात को देखते हुए बीजेपी की तरफ से बड़ा हमला किया गया. बीजेपी के राज्यसभा सांसद राकेश सिंहा (Rakesh Sinha) ने न्यूज़ 18 से बात करते हुए कहा, ‘जब थाली ही नहीं तो भोजन क्या परोसा जाए ? कांग्रेस का संगठन, नेतृत्व और विचारधारा तीनों लुप्त हो चुके हैं. कांग्रेस सिर्फ एक साइन बोर्ड पार्टी बनकर रह गई है. वहां प्रभारी कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं.’

भाजपा सांसद ने कांग्रेस पर लगाया ये आरोप
राकेश सिंहा ने कांग्रेस के भीतर लोकतंत्र का पराभव होने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ परिवार विशेष की पार्टी होकर रह गई है.जनता का आकर्षण, कार्यकर्ताओं का रुझान और विचारों के प्रति स्पष्टता तीनों की कमी के कारण कांग्रेस के प्रभारी अपने-आप को असहाय महसूस करते हैं.जेडीयू ने भी साधा निशाना

उधर जेडीयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी ने भी कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे में हुई गड़बड़ी और उसके बाद आए चुनाव परिणाम के चलते कांग्रेस के भीतर असंतोष है. इसी का असर दिख रहा है.

गौरतलब है कि कांग्रेस ने बिहार में 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल 19 सीटों पर ही जीत मिल पाई थी. इसके बाद से ही संगठन में फेरबदल को लेकर चर्चा काफी तेज थी. अब गोहिल की विदाई के बाद नए प्रभारी के लिए संगठन को मजबूत करने और पार्टी को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती होगी.


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