भारत-नेपाल सीमा पर त्रिवेणी संगम में लगती है आस्था की डुबकी, जानें इसका धार्मिक महत्व

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पश्चिम चंपारण में भारत नेपाल सीमा पर त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी.

भारत-नेपाल सीमा (Indo-Nepal Border) पर स्थित बाल्मीकिनगर की पौराणिक महत्ता है. सीता माता से जुड़े होने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है. पौराणिक नदी नारायणी, स्वर्णभद्रा और ताम्रभद्रा (River Narayani, Swarnabhadra, Tamrabhadra) की त्रिवेणीसंगम में लोग स्नान कर स्वयं को धन्य समझते हैं.

बगहा. कु़ंभ योग में  वाल्मीकिनगर के त्रिवेणी संगम ( Triveni Sangam) पर अमावस्या स्नान के लिए साधु महात्मा के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. भारत- नेपाल की सीमा (Indo-Nepal Border) पर स्थित वाल्मीकिनगर में पौराणिक नदी नारायणी, स्वर्णभद्रा और ताम्रभद्रा (River Narayani, Swarnabhadra, Tamrabhadra) की त्रिवेणीसंगम का बड़ा महत्व है. इन नदियों का नाम कालक्रम में क्रमशः गंडकी, सोन और तमसा हो गया. संक्रांति उत्सव पर संगम स्नान को विशेष फलदायी माना जाता है. अनेक ज्योतिषीय योग के कारण इस बार इसका महत्व और बढ़ गया है. ज्योतिष में सूर्य, चंद्रमा और वृहस्पति के एक ही राशि में आने से कुंभ योग बनता है. इस समय वृहस्पति मकर राशि में हैं. स्नान के लिए सन्तों के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ भी पहुंची.

आदिकुंभस्थली सिमरियाधाम से आए संत करपात्री अग्निहोत्री परमहंस स्वामी चिदात्मा जी महाराज ने इस दुर्लभ योग के विषय में विस्तार से बताया. इस अवसर पर बाल्मीकिनगर के मंदिर में अनंत श्रीकोटि हवनात्मक अंबा महायज्ञ के एक करोड़ आहुति की पूर्णाहुति गुरुवार को संपन्न हुई. इस यज्ञ में देश के कई प्रांतों से लोग सम्मिलित हुए.

कुम्भ क्षेत्र में पूरी हुई एक करोड़ आहुति
इससे पूर्व अन्य कुंभ क्षेत्र में एक एक करोड़ आहुति पूर्ण होने पर पूर्णाहुति होती रही है. आदिकुंभस्थयी सिद्धाश्रम सिमरियाधाम में अब तक 70 करोड़ आहुति पड़ चुकी है. यहां पूर्णाहुति के पश्चात अभिवृथ (यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात किया जाने वाला स्नान) के साथ साथ कुंभ योग स्नान भी संपन्न हुआ.बाल्मीकिनगर की पौराणिक महत्ता 

बाल्मीकिनगर की पौराणिक महत्ता है. सीता माता से जुड़े होने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है. यहां स्थित पौराणिक स्थलों को पुनर्जागृत करने का प्रयास होना चाहिए.

रिपोर्ट- मुन्ना राज


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