मंदिर पक्ष ने कहा- किसी आक्रांता के मंदिर नष्ट करने से उसकी दिव्यता खत्म नहीं होती, पढ़ें कोर्ट में हुई पूरी बहस

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वाराणसी: ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी प्रकरण में बुधवार 13 जुलाई को भी सुनवाई जारी रही. मंदिर पक्ष ने अपनी बहस को पूरा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग करीब 25 जजमेंट भी अदालत में पेश किए. साथ ही मंदिर पक्ष से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने कहा कि अगर कोई आक्रांता आकर हमारे मंदिर को नष्ट भी कर दे तो उसकी दिव्यता खत्म नहीं होती. जबकि कल बहस की शुरुआत करते हुए मंदिर पक्ष के अधिवक्ता ने कहा था कि कहीं भी नमाज पढ़ लेने से वो जगह मस्जिद नहीं हो जाती.

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इस पर न्यूज 18 से बातचीत में मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता तौहीद अहमद ने कहा कि हमने अपनी बहस में कई सारे एक्ट का हवाला दिया है. रही बात नमाज होने से मस्जिद होने की तो वहां नमाज होती थी, होती है और आगे भी होती रहेगी.

मस्जिद पक्ष की आपत्ति पर जवाब देने लगेगा वक्त
बुधवार को आज अदालत में सुनवाई के दौरान विष्णुशंकर जैन ने आर्टिकल 25 की मस्जिद पक्ष की आपत्ति पर 1995 का हवाला देते हुए अगर कहीं नियमों का उल्लघंन होता है तो आप सीधे सिविल कोर्ट आ सकते हैं. वीके मुखर्जी और रामजानकी डेटीज के केस का भी हवाला दिया. इस्माइल फारुखी के केस का भी मंदिर पक्ष ने हवाला दिया. यही नहीं काशी विश्वनाथ एक्ट का महत्व क्या है और स्वयंभू देवता किसे कहते हैं, इस पर भी मंदिर पक्ष ने विस्तार से अपनी बात रखी. माना जा रहा है कि मस्जिद पक्ष की आपत्ति पर अपना पूरा जवाब देने में अभी दो से तीन तारीखों की सुनवाई का वक्त लग सकता है.

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मुझको लेकर आपत्ति एक बड़ी साजिश का हिस्सा
सुनवाई के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन ने कहा कि मुझको लेकर जो आपत्ति कल वादी राखी सिंह की ओर से उठाई गई थी, वही आज मस्जिद पक्ष से भी उठाई गई. मैं सुप्रीम कोर्ट में स्टेट काउंसिल हूं और मैंने वाराणसी की अदालत में बतौर वकील बहस करने का आदेश भी बीते दिनों प्रस्तुत कर दिया था. ये सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा है. पहले वादी राखी सिंह का केस वापस लेने की चर्चा और अब वकील हटाने की बात बड़ी साजिश है.

Tags: Gyanvapi Masjid, Gyanvapi Masjid Controversy, ज्ञानवापी सर्वे में शिवलिंग



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