मध्य प्रदेश सरकार ने कोरोना इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों की मनमानी पर कसा शिकंजा, तय की फीस

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने निजी अस्पतालों के द्वारा कोरोना के इलाज के नाम पर ज्यादा फीस वसूलने पर शिकंजा कसा है.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की शिवराज सरकार ने कोरोना (Corona) के इलाज के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलने वाले अस्पतालों (Hospitals) पर लगाम लगाने की दिशा में कदम उठाया है, शिवराज सरकार ने अस्पतालों में सभी जांचों की फीस (Fees) तय कर दी है.

भोपाल. मध्य प्रदेश(Madhya Pradesh) में कई अस्पताल (Hospital) पिछले एक साल से कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के नाम पर लोगों से मनमानी पैसा वसूल रहे हैं. अब निजी अस्पतालों की मनमानी पर मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने शिकंजा कसा है और सभी चीजों की फीस (Fees) तय कर दी है. बुधवार को जारी आदेश में सरकार ने भर्ती मरीजों के टेस्ट से लेकर रेमडीसिविर इंजेक्शन के इस्तेमाल तक को लेकर निर्देश जारी किए हैं.

कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में काम आने वाले ‘रेमडीसिविर इंजेक्शन’ के उपयोग की ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा ‘रिस्ट्रिक्टेड इमरजेंसी यूज’ के लिए ही अनुमति दी गई है. इसका उपयोग कोरोना नियंत्रण एवं उपचार की गाइडलाइन अनुसार ही किया जाए. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में स्वास्थ विभाग एवं सभी संबंधितों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. रेमडीसिविर इंजेक्शन का उपयोग इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन के अंतर्गत रिस्ट्रिक्टेड इमरजेंसी यूज के लिए ही मान्य है. इस परिस्थिति को छोड़कर डॉक्टर इंजेक्शन को प्रिसक्राइब न करें और ना ही फार्मासिस्ट दें.

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डॉक्टर को बताना होगा वजह

कोरोना का इलाज कर रहे डॉक्टर द्वारा अपने प्रिस्क्रिप्शन पर उन इमरजेंसी परिस्थितियों का उल्लेख करना होगा, जिनमें यह इंजेक्शन दिया जाना आवश्यक है. रेमडीसिविर इंजेक्शन के उपयोग के लिए भारत सरकार स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 3 जुलाई 2020 को जारी ‘अपडेटेड क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकोल फॉर कोविड-19’ का पालन सुनिश्चित किया जाए. रेमडीसिविर इंजेक्शन का रिकॉर्ड औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत रखा किया जाए तथा निरीक्षण के दौरान जांच अधिकारी को प्रस्तुत किया जाए.


सरकार ने कोरोना जांचों की दरें निर्धारित की

सरकार ने निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, डायग्नोस्टिक सेंटर आदि में कोरोना संबंधी जांचों की दरें निर्धारित करल दी है. साथ ही निर्देश दिए हैं कि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूल करने वालों के खिलाफ संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी. मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ अधिनियम 1940 के तहत राज्य शासन द्वारा 18 मार्च 2020 को अधिसूचना जारी कर पूरे मध्य प्रदेश में कोरोना बीमारी को संक्रामक घोषित किया गया है. डिजास्टर मैनेजमेंट अधिनियम 2005 के तहट यदि कोई भी व्यक्ति इस बीमारी के संबंध में कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे राज्य शासन, केंद्रीय शासन अथवा अन्य सक्षम प्राधिकारी को रोकता है. अगर कोई निर्देशों का पालन करने से मना करता है, तो उसे 1 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा दी जा सकती है.

टेस्ट और उनकी निर्धारित दर
1. ए.बी.जी. (ABG) ₹600/-
2. डी- डाइमर (D-Dimer) ₹500/-
3. प्रोकैल्सिटोनिन (Procalcitonin) ₹1000/-
4. सी.आर.पी. (CRP) ₹200/-
5. सीरम फैरिटिन (Serum Ferritin) ₹180/-
6. आई.एल.6 (IL6) ₹1000/-



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