महिला प्रोफेसर के कोरोना संक्रमित होने पर 10 दिन तक सिख परिवार ने किया उनके बच्चे का पालन पोषण-Sikh family take care of child after her mother gets corona infected hrrm

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कोरोनो संक्रमित महिला के बच्चे की सिख परिवार ने की मदद

प्रोफेसर मोनिका (Monika) ने कहा वो घर में अकेली थी. एक वक़्त ऐसा लगा की अब कुछ दिन में मर जाऊंगी. मौत (Death) के डर के चलते घर के सभी काम निपटाने शुरू कर दिए.

सिरसा. कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच निरंतर लोगो की मौत (Death) हो रही है. अधिकतर मौत तनाव की वजह से भी हो रही है. कोरोना संक्रमित तनाव में आकर इस दुनिया को छोड़कर चले जाते हैं, लेकिन सिरसा के चौधरी देवीलाल विश्विद्यालय की प्रोफेसर मोनिका वर्मा (Monika Verma) ने कोरोना को हराया है. हालांकि अकेले रहने के कारण संक्रमण के दौर में एक समय ऐसा भी आया कि जब ये सोचा लिया कि अंतिम समय नजदीक है. उसकी वजह से किसी को परेशानी न हो, इसलिए घर और कार्यालय के बकाया काम भी निपटाने शुरू कर दिए. अकेले होने के कारण बेटे की परवरिश की भी चिंता सताने लग पड़ी, लेकिन इस दौर में एक पीएचडी स्कॉलर के एक सिख परिवार ने ऐसी मदद की, जिंदगी भर भी उनका कर्ज नहीं उतार सकूंगी. मोनिका ने बताया की एक वक़्त तो ऐसा लगा की मैं बस अब कुछ दिनों में मर जाउंगी, लेकिन मैं कोरोना से लड़ी और ठीक होकर अपने बच्चे के साथ हूं. दरअसल  प्रोफेसर मोनिका वर्मा को दो अप्रैल को कोरोना संक्रमित होने के बाद वह घर पर ही क्वारंटाइन हो गई. बेटा हिमाचल के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता था और भाई का परिवार भी कोरोना संक्रमित हो गया. इसी बीच मानसिक तनाव ने घेर लिया कि मौत नजदीक है. न टीवी देखना अच्छा लगता था और न ही पूजा पाठ में मन लगता. इसी मान‌सिक तनाव के बीच बचे हुए कामों को निपटाना शुरू कर दिया कि उनकी वजह से किसी का काम प्रभावित न हो. काम निपटाते हुए आत्मविश्वास आया और कोरोना को हराने का फैसला किया. प्रोफेसर मोनिका वर्मा ने बताया कि बेटा हिमाचल के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है, इसलिए उसे अपने बीमार होने की सूचना नहीं दी. एक दिन स्कूल में फोन किया तो रो-रो कर बुरा हाल हो गया. स्कूल प्रबंधन ने भी इस हालात में बेटे से बात न करने की सलाह दी. इसी बीच बोर्डिंग स्कूल में कोरोना संक्रमण के केस आ गए. प्रबंधन ने स्कूल को बंद करने का फैसला लिया और सभी को फोन करके बेटे को ले जाने के संदेश भेज दिए. बच्चे को दस दिनों तक पूरा लाड़ प्यार कियामैं कोरोना संक्रमित थी, इसलिए जा नहीं सकती थी. इस बात का पता मेरे एक पीएचडी स्कॉलर को पता चला तो उसने बेटे को लेकर आने के लिए हामी भरी. गाड़ी को सैनिटाइज करवाने के बाद बेटे को हिमाचल बोर्डिंग स्कूल से लेकर सिरसा पहुंचे. बेटे को घर नहीं रख सकती थी, ऐसे में उसके परिवार ने बेटे को अपने पास रखने का फैसला लिया. पीएचडी स्कॉलर के पिता मेवा सिंह सेखों और माता सुरेंद्र कौर ने उसके बेटे को अपने परिवार के एक सदस्य की तरह रखा और दस दिनों तक पूरा लाड़ प्यार किया. जिंदगी भर नहीं चुका सकूंगी कर्ज जब वह ठीक हुई, तब उसके पीएचडी स्कॉलर का परिवार उसके बेटे को घर छोड़कर गया।.मोनिका वर्मा ने बताया कि उस परिस्थतियों में स्कॉलर के परिवार ने जो उसकी सहायता की, वह जिंदगी भर उनका कर्ज नहीं चुका सकेंगी.



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