मुजफ्फरनगर के इस गांव में हर घर में है ‘गुड़ का कोल्हू’, एक दिन में बिकता है 600 क्विंटल गुड़

0
11


रिपोर्ट: अमोल कुमार

मुजफ्फरनगर. चीनी के कटोरे के नाम से मशहूर यूपी का मुजफ्फरनगर इस समय गुड़ की खुशबू से महक रहा है. गन्ना किसानों की खुशहाली का सबब बने इस क्षेत्र में गुड़ ने भी आर्थिक स्वतंत्रता के कई रास्ते खोले हैं. मुजफ्फरनगर का गुड़ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी मशहूर है. एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी भी जनपद मुजफ्फरनगर में ही है. इसके अलावा मुजफ्फरनगर के गुड़ का नाम एक जिला एक उत्पाद (One District One Product) में भी शामिल है. आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे जिसमें सबसे ज्यादा गुड़ के कोल्हू लगाए जाते हैं.

मुजफ्फरनगर के नुनाखेड़ा में हर घर में गुड़ का व्यापार किया जाता है. इस गांव में 50 से भी अधिक गुड़ के कोल्हू हैं, जहां पर विभिन्न प्रकार का गुड़ बनाया जाता है और दूर-दूर तक सप्लाई भी किया जाता है. इस गांव में जाते ही आपको हर दस कदम पर गुड़ के कोल्हू नजर आएंगे, जिनमें 24 घण्टे आपको गुड़ बनता नजर आएगा. इन गुड़ कोल्हू में 2 शिफ्ट में काम किया जाता है. दरअसल गुड़ को तैयार करने वाले कारीगर 12-12 घंटे की शिफ्ट लगाते हैं. अगर गुड़ की कीमत की बात की जाए तो यह 30 रुपए किलो से शुरू होता है. हालांकि गांव में अलग अलग गुड़ की अलग अलग कीमत है.

नुनाखेड़ा है काफी मशहूर
न्यूज़ 18 लोकल को गुड़ कोल्हू के मालिक (ग्रामीण) मोजिन्दर ने बताया कि हमारा गांव नुनाखेड़ा जनपद मुजफ्फरनगर ही नहीं बल्कि और जनपदों में भी काफी मशहूर है. हमारे गांव का गुड़ बहुत ही ज्यादा मशहूर है. हमारे गांव में कई प्रकार का गुड़ को तैयार किया जाता है. इस गुड़ को हमारे गांव के ग्रामीण स्वयं ही तैयार करते हैं. इस गांव की एक और विशेषता है. इस गांव का हर एक परिवार गुड़ का काम करता है. इस गांव में करीब 600 कुंतल गुड़ एक दिन में ही तैयार कर दिया जाता है, जिसकी खपत साथ के साथ ही हो जाती है. इस गांव का गुड़ गुड़ मंडी तक नहीं पहुंचता क्योंकि ग्राहक स्वयं ही कोल्हू परआकर गुड़ को खरीद कर ले जाते हैं.

दूसरे राज्यों और विदेश में भी गुड़ सप्लाई
मुजफ्फरनगर में उत्पादित गुड़ की काफी डिमांड है. यही कारण है कि यहां का गुड़ राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में भेजे जाता है. निर्यात होने वाले गुड़ में आम तौर से चाकू, पपड़ी, मिंजा, रसकट, शक्कर, लड्‌डू, खुरपा, चौरसा आदि वैरायटी शामिल हैं, जिले में गुड़ की थोक मंडी 1954 में स्थापित हुई थी.

Tags: Muzaffarnagar news, UP news



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here