मेरठ-बंदरों नें मचा रखा था आतंक, वन विभाग नें लगा दी ये फोटो, फिर देखिऐ क्या हुआ हाल

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मेरठ:-आज के दौर की बात की जाए तो विभिन्न क्षेत्रों में आपको बड़े-बड़े काटआउट देखने को मिलेंगे.लेकिन हम आपको एक ऐसे कटआउट के बारे में बताएंगे.जोकि आपको बिल्कुल आश्चर्यचकित कर देगा.जी हां हम बात कर रहे हैं लंगूर Baboon के कटआउट cut-out की.जिसका उपयोग मेरठ Meerut का वन विभाग forest department द्वारा बंदरों monkeys को भगाए जाने के लिए किया जा रहा है.दरअसल बंदरों के आतंक से मेरठ शहर city से लेकर गांव village तक हर कोई परेशान है.गांव में किसानों farmer की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं.तो शहर के लोगों पर बंदर ने हमला कर घायल भी कर दिया.इन्हीं बातों को देखते हुए अब वन विभाग द्वारा एक नया प्रयोग करने जा रहा है.वन विभाग लंगूर के कटआउट के माध्यम से बंदरों को दूर भगाना चाहता है. वन विभाग द्वारा इसके लिए कटआउट भी बनवा लिए गए हैं.जो अपने ही क्षेत्र के साथ कई और इलाकों में इनको लगाया जाएगा.

सफलता मिलने पर ही अन्य स्थानों पर होगा उपयोग
वन विभाग के डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि लंगूर के कटआउट का उपयोग पहले कुछ सीमित क्षेत्रों में ही किया गया है.जिसमें पूर्ण सफलता तो नहीं मिली है.लेकिन थोड़ा असर जरूर देखने को मिल रहा है.ऐसे में इसी कटआउट में और क्या नई तब्दीली कर के इसका बेहतर रिजल्ट निकल पाए.उसके लिए भी कार्य किया जा रहा है.

लंगूर से डरता है बंदर
बंदर भले ही कितना ही खुराफाती क्यों न हो.लेकिन जैसे ही उसके सामने लंगूर आता है. वह लंगूर को देख कर भाग जाता है.यही कारण है कि कई बार बंदर को भगाने में लंगूर का सहारा लिया जाता है.लेकिन नियम के अनुसार लंगूर का उपयोग करना प्रतिबंध है.इसी वजह से कट आउट के माध्यम से वन विभाग प्रयोग कर रहा है.सफलता मिलने के बाद नगर निगम द्वारा जिन क्षेत्रों में भी वन विभाग को कटआउट रखने के लिए कहा जाएगा उन इलाकों में लंगूर के कटआउट लगाए जाएंगे.दरअसल इस तरह का उपयोग दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों में भी किया जा रहा है जहां पर कुछ स्थानों पर सफलता भी मिली है.

बताते चले कि मेरठ में जागृति विहार,गंगानगर,साकेत सहित शहरी क्षेत्रों में भी तेजी से बंदरों का आतंक बढ़ा है.बंदरों को पकड़ने की भी परमिशन मांगी जाती है.लेकिन उनकी अनुमति नहीं मिल पाती. ऐसे में एक अनूठा प्रयास किया जा रहा है.जिससे बंदरों के आतंक से शहर वासियों को बचाया जा सके.

रिपोर्ट:- विशाल भटनागर, मेरठ

आपके शहर से (मेरठ)

उत्तर प्रदेश
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Tags: Forest department, मेरठ



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