मेरठ में डरा रहा लंपी वायरस, 156 गायों में पुष्टि, किया गया क्वारंटाइन

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हाइलाइट्स

दौराला सरधना और सकौती इलाके में सबसे ज्यादा केस.
लंपी एक वायरल डिजीज है, जो पशुओं को प्रभावित करती है.

मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ में अब लंपी वायरस का कहर शुरू हो गया है. यहां अब तक 156 गायों में इस बीमारी के संक्रमण की पुष्टि हुई है. खासतौर से दौराला सरधना और सकौती इलाके में सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं. मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अखिलेश गर्ग के अनुसार, संक्रमित गायों को अलग रखने की व्यवस्था की गई है. गायों को क्वारंटाइन किया गया है.

बता दें, मेरठ में 24 गौशाला संचालित हैं और तकरीबन छह हजार गायें यहां रहती हैं. ऐसे में आजकल लंपी वायरस की एंट्री से पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जल्द ही कंट्रोल रुम स्थापित कर हेल्पलाइऩ नंबर जारी किया जाएगा. मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि इसकी वैक्सीन IVRI तैयार कर रही है. जल्द ही सभी गायों का वैक्सीनेशन होगा.

जांच के लिए भेजे गए सैम्पल
मेरठ के दौराला, गंगानगर, सरधना समेत जिले के कई इलाकों में ऐसे केस सामने आ रहे हैं. वायरस को लेकर पशु पालकों में भी हड़कंप है. मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अखिलेश गर्ग के मुताबिक, सैंपल जांच को भेजे गए हैं. बीमारी के प्रकोप को देखते हुए शासन से पशुपालन निदेशक के नेतृत्व में टीम मेरठ पहुंची. टीम ने सरधना में निरीक्षण भी किया.

गायों के शरीर पर गांठ के निशान
सभी पशुओं का उपचार किया जा रहा है. पशु चिकित्सक बताते हैं कि अगर किसी पशु को तेज बुखार आता है तो तत्काल पशुपालन विभाग के डॉक्टर को बताएं. कई गायों के शरीर पर गांठ के निशान भी दिख रहे हैं. शासन से पशुपालन निदेशक डॉ. इंद्रमणि चौधरी के नेतृत्व में एक टीम मेरठ पहुंची है. डॉ. इंद्रमणि सिंह ने सरधना क्षेत्र स्थित गोशाला का औचक निरीक्षण किया. उन्होंने खंड विकास अधिकारी तथा पंचायत सचिव को निर्देश दिया कि गोवंश को समय से चारा पानी के साथ पौष्टिक आहार दें. पशु चिकित्सक से वैक्सीन, कैशबुक, उपस्थित पंजिका, बाह्य रोगी पंजिका, दवा की उपलब्धता आदि के बारे में भी जानकारी ली.

क्या है लंपी वायरस
गौरतलब है कि लंपी एक वायरल डिजीज है, जो पशुओं को प्रभावित करती है. आमतौर पर यह खून चूसने वाले कीड़ों, मच्छर की कुछ प्रजातियों और पशुओं के कीड़े के काटने से फैलती है. यह बीमारी संक्रमित पशु से दूसरे पशुओं में तेजी से फैल जाती है. इसकी चपेट में आने वाले पशुओं को बुखार आता है और स्किन पर जगह-जगह निशान बन जाते हैं.

संक्रमण से बचाव के उपाय
पशु चिकित्सकों का कहना है कि अपने जानवरों को संक्रमित पशुओं से अलग रखना चाहिए. गोशाला में कीटों की संख्या पर काबू करने के उपाय करने चाहिए. मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी, और चिंचडी का उचित प्रबंध करना चाहिए. रोगी पशुओं की जांच और इलाज में उपयोग हुए सामान को खुले में नहीं फेंकना चाहिए. अगर गोशाला या उसके आस-पास किसी असाधारण लक्षण वाले पशु को देखते हैं तो तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल में इसकी जानकारी दें. पशुपालकों को भी अपने शरीर की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए.

Tags: Cow, Meerut news, Virus



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