मेरठ मेडिकल कॉलेज ने किया कमाल, डॉक्टरों ने पहली बार लिवर का मध्य भाग काट कर निकाला

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मेरठ. उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध मेरठ मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. यहां सुपरस्पेशलिटी विभाग के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनो सर्जरी विभाग के डॉ. शिबुमोन ने पहली बार लिवर के मध्य भाग को काट कर निकाला. मेरठ मेडिकल कॉलेज में लिवर की इस तरह की शल्यचिकित्सा पहली बार हुई है.

अस्पताल के मीडिया प्रभारी डॉ. वीडी पांडेय ने बताया कि मरीज के लिवर के मध्य भाग में फोड़ा हो गया था, इसलिए लिवर के मध्य भाग को काट कर निकलना पड़ा. मरीज अब सुपरस्पेशिएलिटी विभाग में भर्ती है तथा खतरे से बाहर है. वहीं प्रधानाचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने डॉ. शिबुमोन तथा पूरी टीम को इस सफल ऑपरेशन के लिए बधाई दी है.

इधर लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध सरदार वल्लभ भाई पटेल चिकित्सालय के बाल रोग विभाग में बच्चों की ह्रदय संबंधी जन्मजात बीमारियों का इलाज ने गति पकड़ ली है. डॉ. वीडी पाण्डेय ने बताया कि बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मुनेश तोमर एवं उनकी टीम ने मेरठ निवासी 2 बच्चियों रिदा उम्र 9 महीने और निधि उम्र 9 वर्ष का बिना चीरा लगाए दिल में जन्म से उपस्थित छेद को सफलतापूर्वक बंद किया है. दोनों ही बच्चियां पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं और अस्पताल के बच्चा वार्ड में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रही है.

लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ के प्रधानाचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने मेडिकल कॉलेज में ई-संजीवनी हब का भी उद्घाटन किया. ई-संजीवनी की नोडल अधिकारी डॉक्टर श्वेता शर्मा ने बताया ई-संजीवनी हब द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, वैलनेस सेंटर पर आने वाले मरीज मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों द्वारा परामर्श ले पाएंगे.

लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक पिछले 1 साल से ई-संजीवनी द्वारा 6000 के करीब मरीजों को स्वास्थ्य लाभ दे चुके हैं. टेलीमेडिसिन की नोडल अधिकारी डॉ ललिता चौधरी के अनुसार मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कोविड-19 प्रथम वेब से ही टेलीकंसल्टेशन ईसीसीएस द्वारा ढाई हजार से अधिक मरीजों को स्वास्थ्य लाभ दे चुके हैं. इसी शृंखला में ई-संजीवनी हब की स्थापना मरीजों के बेहतर उपचार में मील का पत्थर साबित होगी.

Tags: Meerut news



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