मैच से पहले हो रही थी उल्टी, कुछ देर में गोल्ड जीतकर ऐश्वर्य बने सबसे युवा चैंपियन

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ऐश्वर्य 20 साल की उम्र में इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले युवा भारतीय निशानेबाज भी बन गए. photo: news18 hindi

टोक्यो ओलिंपिक में भारत को अपने जिन खेलों से सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं, उनमें एक शूटिंग भी है. खास बात ये है कि भारत के शूटर्स इस समय प्रदर्शन भी कमाल का कर रहे हैं. इनमें से एक नाम ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर (Aishwary Prata Singhp Tomar) है. आईएसएसएफ विश्व कप (ISSF World Cup)के पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री स्पर्धा के फाइनल में ऐतिहासिक स्वर्ण के बाद वह एक बार फिर सुर्खियों में हैं.

नई दिल्ली: ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर (Aishwary Prata Singhp Tomar) के बुधवार को यहां आईएसएसएफ विश्व कप (ISSF World Cup)के पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री स्पर्धा के फाइनल में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत लिया. ऐश्वर्य 20 साल की उम्र में इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले युवा भारतीय निशानेबाज भी बन गए. उन्होंने डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज पर 462.5 अंक से पहला स्थान हासिल किया और हंगरी के स्टार राइफल निशानेबाज इस्तवान पेनी (461.6) और डेनमार्क के स्टेफेन ओलसेन (450.9) से आगे रहे.

उनकी ये जीत इतनी आसान भी नहीं रही. मैच से पहले सुबह बड़े मैच का प्रेशर इतना था कि उन्हें उल्टियां होने लगीं. NEWS18 हिंदी से बातचीत करते हुए ऐश्वर्य ने बताया कि ऐसा कई बार होता है, जब आप बड़े मैच में उतरते हैं, तो ऐसा होना स्वाभाविक है. इसलिए तबीयत ऊपर नीचा होने पर उन्होंने अपना संयम नहीं खोया और अपना स्वाभाविक खेल खेला और नतीजा सबके सामने था. ऐसा उनके साथ पहले भी हो चुका था. इसलिए उन्हें इसकी आदत है. ऐश्वर्य कहते हैं कि आने वाले दिनों में और बड़े मैच हैं, ऐसे में ये उनके लिए एक लर्निंग की तरह है. ऐश्वर्य ने भारत के लिये दिन की शुरूआत सोने के तमगे से की. उन्होंने सीनियर विश्व कप में अपना पहला स्वर्ण जीतने के बाद कहा, ‘तोक्यो ओलंपिक से पहले इस पदक से मेरे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी.’

बस कुछ कदम दूर हैं ओलिंपिक के टिकट से
ऐश्वर्य तोक्यो ओलंपिक के लिये कोटा हासिल कर चुके हैं. हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई है, लेकिन उन्हें यकीन है कि वह टोक्यो में देश का परचम लहराएंगे. ऐश्वर्य ने 2019 एशियाई निशानेबाजी चैम्पियनशिप की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिये ओलंपिक कोटा हासिल किया था. उन्होंने तीन दिन पहले दीपक कुमार और पंकज कुमार के साथ मिलकर पुरूष टीम एयर राइफल स्पर्धा में रजत पदक भी जीता था. अंकित राजपूत क्वालीफिकेशन में 1172 अंक से शीर्ष पर थे जबकि ऐश्वर्य और नीरज कुमार ने 1165 का समान स्कोर जुटाया. ऐश्वर्य नीलिंग पोजिशन में 155.0 अंक से आठ पुरूषों के फाइनल में सबसे आगे थे जबकि प्रोन में 310.5 अंक से ओलसेन (311.4) के पीछे और पेनी (309.5) से आगे दूसरे स्थान पर रहे.

मैच से पहले हो रही थी उल्टी, कुछ देर में गोल्ड जीतकर ऐश्वर्य बने सबसे युवा चैंपियन

गोल्ड जीतने के बाद ऐश्वर्य (बीच में)

ऐश्वर्य ने शानदार शुरूआत करते हुए कुछ समय तक बढ़त भी बनाये रखी, लेकिन उन्होंने स्टैंडिंग एलिमिनेशन चरण में 10.4, 10.5 और 10.3 अंक जुटाकर वापसी की.

महिला टीम का भी शानदार प्रदर्शन
शूटिंग में एक ओर जहां लडकों की टीम झंडा बुलंद कर रही है. वहीं लड़कियों की टीम में अपने हिस्से में सुनहरी कामयाबी जोड़ रही है. भोपाल की निशानेबाज चिंकी ने अनुभवी राही सरनोबत के साथ कड़ी प्रतिद्वंद्वी मनु भाकर को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जिससे भारत ने स्पर्धा तीनों पदक जीत लिए. इस प्रदर्शन से भारत की निशानेबाजी में प्रतिभा की गहराई का भी अंदाजा लग जाता है, जिससे भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या नौ हो गई देश के कुल 19 पदक (पांच रजत और इतने ही कांस्य) हो गये हैं. तेईस साल की चिंकी ने समान 32 अंक के कारण हुए शूट-ऑफ में सरनोबत को 4-3 से पछाड़ दिया. उन्नीस साल की मनु ने एलिमिनेशन चरण में 28 अंक से कांस्य पदक से संतोष किया, जिसके बाद चिंकी और सरनोबत के बीच शीर्ष स्थान के लिये मुकाबला हुआ. ये तीनों निशानेबाज तोक्यो ओलंपिक के लिये पहले ही कोटा हासिल कर चुकी हैं. चिंकी ने 2019 में दोहा में हुई 14वीं एशियाई चैम्पियनशिप में दूसरे स्थान पर रहकर ओलंपिक कोटा जीता था. पहले 20 निशानों में वह 14 के स्कोर से आगे चल रही थी. उनके बाद मनु 13 अंक से दूसरे स्थान पर थीं.

चिंकी ने 21 के स्कोर से बाकियों पर बढ़त बना ली जिसके बाद शुरू में जूझने वाली अनुभवी सरनोबत ने भी वापसी की. फाइनल्स में चिंकी ने दो सही निशानों से शुरूआत की लेकिन फिर दो बार (एलिमिनेशन चरण की दूसरी और छठी सीरीज) पाचों के पांचों निशाने सही लगाए. चिंकी ने कहा, ‘मैंने फाइनल में टाई होने के लिये भी पहले ही ट्रेनिंग की हुई थी, मुझे सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ करना था. मुझे इस बारे में नहीं सोचना था कि प्रतिस्पर्धा में कौन मेरे साथ है और उनका स्तर कैसा है.’

इन तीनों में सबसे अनुभवी सरनोबत ने पहले चरण की तीसरी सीरीज में सभी पाचों निशानों पर अंक जुटाये जिसके बाद एलिमिनेशन में चौथी, सातवीं और नौंवी सीरीज में चार चार निशाने लगाये. तीसरी रैंकिंग की मनु चौथी सीरीज में ही पांचों के पांचों निशाने सही लगा पायी.



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