मौत को मात देने से कम नहीं है पिथौरागढ़ में स्टूडेंट्स के लिए बोर्ड परीक्षा देना

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दुर्गम-अति दुर्गम इलाकों में मौजूद परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचना ही किसी चुनौती से कम नही है.

ज़िले में इस बार 94 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं जिनमें से 57 दुर्गम और 21 अतिदुर्गम इलाकों में हैं.

पिथौरागढ़ ज़िले में इस बार बोर्ड परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स को खासी दिक्कत उठानी पड़ सकती है. ज़िले के ज्यादातर परीक्षा केन्द्र दुर्गम या फिर अतिदुर्गम में मौजूद हैं. बीते साल आई आपदा के चलते इन इलाकों में अब भी रास्ते टूटे हुए हैं और आवाजाही बेहद मुश्किल है. ऐसे में इन दुर्गम-अति दुर्गम इलाकों में मौजूद परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचना ही किसी चुनौती से कम नहीं है.

94 परीक्षा केन्द्र

बीते साल आई आपदा से बॉर्डर इलाकों के लोग अभी भी जूझ रहे हैं. हालात यह हैं कि कई इलाकों में आज भी रास्ते पूरी तरह टूटे हैं. इन इलाकों में पहुंचना मौत को मात देने से कम नही है. ऐसे में अब सबसे बड़ी चुनौती उन स्टूडेंट्स के सामने है,जिन्हें बोर्ड परीक्षा देनी है.

बता दें कि ज़िले में इस बार 94 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं जिनमें से 57 दुर्गम और 21 अतिदुर्गम इलाकों में हैं. मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक जुकरिया का कहना है कि छात्रों को दिक्कत न उठानी पड़े इसके लिए सभी इंतजाम किए गए हैं. अतिदुर्गम और दुर्गम परीक्षा केन्द्रों में फर्नीचर आदि की बेहतर व्यवस्था की गई है.20 किलोमीटर तक पैदल

अधिकांश दुर्गम और अतिदुर्गम परीक्षा केन्द उन इलाकों में हैं, जहां बीते साल बरसात ने जमकर  तांडव मचाया था.  हालत यह है कि पांगू, होकरा, उछेती, जुम्मा, खेला और बनकोट सहित 40 परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचने के लिए स्टूडेंट्स को 20 किलोमीटर तक की दूरी नापनी पड़ेगी.

स्टूडेंट्स की दिक्कतों को देखते हुए प्रशासन ने आपदा राहत के तहत चल रहे कार्यों में तेजी लाने के भी निर्देश दिए हैं ताकि परीक्षाओं तक हालात कुछ हद तक सुधर जाएं.

सुधार कार्य तेजी के साथ करवाने के निर्देश

पिथौरागढ़ के ज़िलाधिकारी विजय जोगदांडे का कहना है कि खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ ही एसडीएम को भी आपदा प्रभावित इलाकों में सुधार कार्य तेजी के साथ करवाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि परीक्षाओं तक कई परीक्षा केन्द्रों की हालात में सुधार आ जाएगा.

मौत को मात देने से कम नहीं है पिथौरागढ़ में स्टूडेंट्स के लिए बोर्ड परीक्षा देना

शिक्षा विभाग ने 75 स्टूडेंट्स पर एक सेंटर बनाने के मानक तय किए हैं जिन्हें पहाड़ी इलाकों में बदले जाने की भी मांग उठ रही है. ऐसे में अब यह देखना शेष है कि आखिर किस तरह सरकारी तंत्र परीक्षाओं के बोझ के बीच छात्रों को राहत पहुंचाता है.


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