यमुना में प्रदूषण फैलाने पर 13 CETP पर लगाया 12 करोड़ का जुर्माना, 2023 तक यमुना को साफ करने की योजना!

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नई दिल्ली. दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने यमुना के प्रदूषण को कम करने के लिए फुलप्रूफ रणनीति तैयार की है. इसको लेकर यमुना में प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रियल यूनिट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है.

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने 13 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) को नोटिस जारी किया है. उन पर 12.05 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है. दिल्ली सरकार की 2023 तक यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना है.

डीपीसीसी द्वारा तमाम निर्देश दिए जाने के बाद भी सीईटीपी को तय मानकों के मुताबिक नहीं पाया गया. दिल्ली सरकार ने जांच में पाया है कि सीईटीपी ठीक से काम नहीं करते हैं जिसकी वजह से यमुना बड़े पैमाने पर प्रदूषित हो रही है. डीपीसीसी ने पाया कि दिल्ली के 13 सीईटीपी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं जो कि यमुना में बड़े पैमाने पर प्रदूषण का कारण बन रहे हैं.

डीपीसीसी प्रयोगशालाओं की मासिक विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर सीईटीपी के ऊपर 12.05 करोड़ रूपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तौर पर देने का नोटिस जारी किया है. उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित जल को शोधित करने में सीईटीपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए निर्धारित मानकों को पालन किया जाना चाहिए.डीपीसीसी की तरफ से सीईटीपी को बार-बार दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया है, इसके कारण कड़ी कार्रवाई की गई है. इसके अलावा भविष्य में भी सीईटीपी के ऊपर नजर रखेंगे.

दिल्ली में 212.3 एमएलडी की क्षमता के 13 सीईटीपी चालू हैं. वजीरपुर, मायापुरी, बवाना, नरेला, एसएमए, जीटीके, ओखला, मंगोलपुरी, नांगलोई, बादली, झिलमिल, लॉरेंस रोड और नारायणा में 13 सीईटीपी का निर्माण 17 औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शोधित करने के लिए किया गया है.

इनमें से 11 सीईटीपी का संचालन संबंधित सोसायटी द्वारा किया जा रहा है. नरेला और बवाना सीईटीपी का संचालन पीएनसी दिल्ली और बवाना इंफ्रा डेवलपमेंट की ओर से किया जा रहा है. इन्हें डीएसआईआईडीसी की ओर से लगाया गया है.

दिल्ली सीईटीपी अधिनियम 2000 के अनुसार दिल्ली में सीईटीपी की जांच और नियमों को लागू कराने की जिम्मेदारी उद्योग आयुक्त के पास है. सीईटीपी नियमों के अनुसार दिल्ली में इनके संचालन और रखरखाव के लिए सीईटीपी सोसायटी का गठन किया गया है. ये सीईटीपी सोसाइटी इनके संचालन और रखरखाव के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार हैं.

इसके अलावा सीईटीपी नियमों के अनुसार औद्योगिक इकाइयों से शुल्क एकत्रित करने की जिम्मेदारी है. पर्यावरण से जुड़े कानूनों का पालन कराना भी सीईटीपी सोसायटी की जिम्मेदारी है. सीईटीपी को अपग्रेड कराने की जिम्मेदारी भी सीईटीपी सोसायटी के पास है.

डीपीसीसी की विश्लेषण रिपोर्ट के मुताबिक बार-बार निर्देश दिए जाने के बाद भी निर्धारित एफिलिएंट मानकों का सीईटीपी ने अनुपालन नहीं किया. इसके बाद 05 अप्रैल को कारण बताओ नोटिस जारी किए गया.

डीपीसीसी प्रयोगशाला की रिपोर्ट का फरवरी 2020 के बाद से मासिक विश्लेषण किया गया जिसके आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के लिए 12.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है.



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