यूपी बोर्ड की परीक्षा को लेकर बच्चे एग्जाम फोबिया और एंजाइटी के हो रहे शिकार, मनोवैज्ञानिक कर रहे काउंसिलिंग

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प्रयागराज. एशिया की सबसे बड़ी परीक्षा संस्था माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड (UP Board) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं (High School And Intermediate Exams) 24 मार्च से शुरू हो रही हैं. यूपी बोर्ड परीक्षा को लेकर परीक्षार्थियों की समस्याओं और जिज्ञासाओं के समाधान के लिए यूपी बोर्ड ने कंट्रोल रूम शुरू किया है. यूपी बोर्ड के मुख्यालय प्रयागराज (Prayagraj) में 11 मार्च से शुरू किए गए कंट्रोल रूम में अब तक 600 से ज्यादा फोन काल्स आये हैं. हर दिन औसतन 125 परीक्षार्थियों के फोन कॉल्स कंट्रोल रूम में आ रहे हैं. यूपी बोर्ड ने कंट्रोल रूम के लिए दो टोल फ्री नंबर भी जारी किए हैं. परीक्षार्थी इन नंबरों पर सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक फोन कर विशेष विषय विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिक से अपनी समस्या का समाधान पा रहे हैं.

यूपी बोर्ड ने टोल फ्री नंबर 1800-180- 5310 और 1800-180-5312 जारी किया है. यूपी बोर्ड की ओर से शुरू किए गए कंट्रोल रूम में सब्जेक्ट एक्सपर्ट के साथ ही मनोवैज्ञानिक परीक्षार्थियों की समस्याओं का समाधान कर रहे हैं. कंट्रोल रूम तीन शिफ्ट में सुबह 8:00 से दोपहर 12:00 बजे, दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे और शाम 4:00 बजे से रात 8:00 बजे तक चल रहा है. कंट्रोल रूम में तैनात विशेष विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों के ज्यादातर फोन कॉल्स कोविड के चलते 30 फीसदी कम किए गए सिलेबस को लेकर है. बच्चों में प्रश्न पत्र को लेकर भ्रम की स्थिति है. बच्चे यह जानना चाहते हैं कि प्रश्न पत्र में प्रश्न कहां से पूछे जाएंगे. परीक्षार्थियों की ओर से यूपी बोर्ड के मॉडल पेपर और पेपर के पैटर्न को लेकर भी कंट्रोल रूम से सवाल पूछे जा रहे हैं. जिसके जवाब में उन्हें बताया जा रहा है कि प्री बोर्ड प्रिपरेशन के आधार पर ही परीक्षा आयोजित होगी और सवाल पूछे जाएंगे.

टाइम टेबल बनाकर तैयारी करने के बारे में बताते हैं
इसके साथ ही बच्चे परीक्षा में किस कलर की पेन का इस्तेमाल करें और क्या उन्हें वैक्सीनेशन कराकर परीक्षा देने जाना है, इस तरह के भी सवाल पूछ रहे हैं. एक-दो दिनों से परीक्षार्थियों की प्रवेश पत्र को लेकर भी काफी समस्याएं आ रही हैं. जिसका समाधान विषय विशेषज्ञ कर रहे हैं. हालांकि, कुछ बच्चे एग्जाम फोबिया से भी ग्रसित हैं. कोविड-19 में प्रॉपर क्लासेज न होने की वजह से कई बच्चों की तैयारी अच्छी नहीं हो पाई है. जिसके चलते उन्हें मन में यह आशंका है कि वह परीक्षा में सफल होंगे कि नहीं होंगे. ऐसे फोन काल्स आने पर मनोवैज्ञानिक डॉक्टर राकेश कुमार सिंह बच्चों की काउंसलिंग करते हैं और उन्हें टाइम टेबल बनाकर तैयारी करने के बारे में बताते हैं.

प्रदेश भर में 8373 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं
मनोवैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार सिंह के मुताबिक, कई बच्चे एंजाइटी के भी शिकार हो रहे हैं. जिसके चलते उनका कहना है कि उन्हें कोई विषय याद नहीं हो रहा है. जबकि वह कई घंटे तक पढ़ाई कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में परीक्षार्थियों की काउंसलिंग की जा रही है और उनका मार्गदर्शन किया जा रहा है. उनमें आत्मविश्वास पैदा किया जा रहा है कि वे अगर शेड्यूल बना कर विषय की तैयारी करेंगे तो निश्चित तौर पर वह सफल होंगे. काउंसलिंग के बाद ज्यादातर बच्चों में कॉन्फिडेंस आ रहा है और वह बोर्ड परीक्षा के लिए भी तैयार हो रहे हैं. गौरतलब है कि यूपी बोर्ड की परीक्षा में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट को मिलाकर 51 लाख 92 हजार 689 परीक्षार्थी सम्मिलित हो रहे हैं. इनमें हाईस्कूल में 27 लाख 81 हजार 654 और इंटरमीडिएट में 24 लाख 11 हजार 35 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे. यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए प्रदेश भर में 8373 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं.

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