यूपी: मेरठ के इस गांधी आश्रम के कारीगरों से क्यों कांपते थे अंग्रेज? जानिए वजह

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रिपोर्ट: विशाल भटनागर

मेरठ: पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ का क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम का आजादी की क्रांति में अहम योगदान माना जाता है. आजादी के लिए जिस प्रकार की भी रणनीति तैयार करनी होती थी, उसकी पूरी पटकथा क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम में ही लिखी जाती थी. यहां पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित अन्य महापुरुषों के आने का विवरण मिलता है. यहीं से देश के लिए आजादी के दीवानों को तैयार किया जाता था.

गांधी आश्रम के क्षेत्रीय मंत्री पृथ्वी सिंह रावत ने NEWS18 LOCAL से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम शुरू से ही क्रांति की पहली पाठशाला की तरह रहा है. यहां पर कार्य करने वाले कारीगर गुप्त तरीकों से क्रांति में अपना अहम योगदान देते थे. कई बार तो अंग्रेजी हुकूमत क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम के कारीगरों को पकड़ कर जेल में डाल देती थी. अत्याचार करती थी, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत को हासिल कुछ नहीं होता था.

जेबी कृपलानी ने रखी थी आश्रम की नींव
इतिहासकार बताते हैं कि वर्ष 1920 में जेबी कृपलानी द्वारा अपने स्टूडेंट के साथ क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम की नींव रखी थी. गांधी आश्रम की स्थापना के बाद से यहां क्रांतिकारी रुकने लगे थे. धीरे-धीरे क्रांतिकारियों का यह प्रमुख स्थानों में से एक हो गया. 1942 में जब अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन को लेकर देशभर में क्रांतिकारियों द्वारा विभिन्न मुहिम चलाई जा रही थी. उस समय क्रांतिकारियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम में ही हुआ करता था.

Tags: Meerut news, Uttar pradesh news



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