योगी सरकार के लिए मुख्तार अंसारी पर कठोर कार्रवाई के क्या हैं मायने? 5 प्वाइंट्स में जानिए-What is meaning for yogi government action against mafia don Mukhtar Ansari Know in 5 points upas

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मुख्तार अंसारी को यूपी की बांदा जेल लाने पर कार्रवाई तेजी से चल रही है. (File Photo)

Lucknow News: माफिया मुख्तार अंसारी को यूपी की जेल में लाने के लिए योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट तक अपील की. लगातार ताकत झोंके रखी. आखिर क्यों? पढ़िए…

लखनऊ. यूपी में बीजेपी की जीत के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने 2017 में सीएम बनते ही अपराधियों को यूपी छोड़ देने की नसीहत दी थी. उन्हीं की सरकार ने माफिया डॉन मुख्तार अंसारी (Mafia Don Mukhtar Ansari) को यूपी लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर क्यों लगा दिया? आखिर क्यों पुलिस के बड़े-बड़े अफसरों से लेकर मंत्री तक इसे योगी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि गिना रहे हैं. सवाल तो ये भी उठता है कि क्या मुख्तार अंसारी पर कार्रवाई सिर्फ एक माफिया के खिलाफ की जा रही कार्रवाई है या इसके कुछ और भी मायने हैं? जानकारों का मानना है कि चुनावी साल से ऐन पहले योगी सरकार के ऐसे एक्शन के बड़े राजनीतिक मायने हैं. आइए जानते हैं वो कौन से पांच बड़े मायने हैं?

  1. अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस की नीति

2017 में सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपराध पर जीरो टॉलरेंस का वायदा किया था. इस वायदे के साथ ही प्रदेश में ताबड़तोड़ एनकाउण्टर्स शुरू हो गये थे. सिलसिला अभी भी जारी है. बदमाशों के साथ प्रदेश के माननीय बन चुके बड़े-बड़े बाहुबलियों पर भी एक्शन शुरू हो गए. भदोही के गोपीगंज से विधायक विजय मिश्रा हों या फिर जौनपुर से सांसद रहे धनंजय सिंह, अतीक अहमद हों या फिर मुख्तार अंसारी, सभी बाहुबलियों की योगी सरकार ने आर्थिक कमर तो तोड़ी ही, उन्हें उनकी करतूत की मुकम्मल सजा भी देने की कोशिश की.

  1. दूसरी सरकारों से अलग दिखने की कोशिश

अपराधियों पर नकेल कसने की कसमें तो सभी सरकारें खाती रही हैं लेकिन, एक्शन के मामले में रवैया दूसरा ही दिखता रहा है. योगी सरकार इस परिभाषा को बदल रही है. सपा और बसपा की सरकारों में भी अपराधियों पर एक्शन हुए लेकिन, बाहुबली माननीयों पर आंच नहीं आई. योगी सरकार ने पिछली सरकारों के उलट अपना रवैया दिखाया है और ये जताने की कोशिश की है कि सत्ता में पैठ बना लेने से बचने का रास्ता नहीं मिल जायेगा.

  1. ब्राह्मण, ठाकुर या फिर मुस्लिम, बाहुबलियों पर एक साथ चाबुक

लखनऊ में हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी की नृशंस हत्या हो, कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों को मारने वाले विकास दुबे का एनकाउण्टर हो या फिर विधायक विजय मिश्रा पर नकेल, इन सभी घटनाओं के बाद योगी सरकार को ब्राह्मण विरोधी बताकर बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया में अभियान चलाया गया था. ये चर्चा अब कहीं नहीं होती. बाहुबली धन्नंजय सिंह, अतीक अहमद और मुख्तार अंसरी पर चोट करके योगी सरकार ने इस मिथक को झूठा करार दे दिया है. उसने बता दिया है कि बाहुबलियों पर कार्रवाई जाति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि चौतरफा की जायेगी.



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