रेहड़ी लगाकर रेडीमेड कपड़े बेचने वाले इस शख्‍स के पास है दो सरकारी गनर, जानें क्‍या है इसकी वजह?

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राकेश प्रताप सिंह

सरकारी सुरक्षा कर्मी गनर रखना उत्तर प्रदेश मे स्टेटस सिम्बल माना जाता है. सरकारी गनर रखने के लिए नेता ऐडी से चोटी तक का जोर लगा देते हैं. बड़े-बड़े नेताओं के आपने सरकारी गनरों और सुरक्षा कर्मियों के साये मे रहते देखा होगा लेकिन एटा जनपद मे लोग अचानक सड़क पर रेहड़ी लगाकर रेडीमेड कपड़े बेचकर गुजारा करने वाले के पास दो-दो सरकारी गनर देखकर आश्चर्य मे पड़ गए. ये रेहड़ी वाला जब अपनी रेहड़ी लगाकर बाजार के फुटपाथ मे कपड़े बेच रहा होता है तो दो सरकारी गनर इसकी सुरक्षा करते हैं.

दरअसल, एटा जनपद के जैथरा कस्बे के गांधी नगर मे रहने वाले अनुसूचित जाति के रामेश्‍वर दयाल ने अखिलेश यादव के बेहद करीबी और गैंगस्टर एक्ट व अन्य कई मुकदमों में आरोपी एटा की अलीगंज सीट से तीन बार के पूर्व विधायक सपा नेता रामेश्‍वर सिंह यादव एवं उनके छोटे भाई सपा नेता पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव व अन्य के खिलाफ जाति सूचक शब्द कहने और बंधक बनाकर जबरन उसकी जमीन का बैनामा करवा लेने का मुकदमा जैथरा थाना मे 3 जून को दर्ज करवाया था.

इस मुकदमे में ही सपा नेताओं की तरह से हाईकोर्ट मे याचिका डालकर इस मुकदमे को झूठा बताते हुए मुकदमें को ख़ारिज कर एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई थी. वादी रामेश्‍वर दयाल ने 3 जून को जैथरा थाना मे सपा नेता पूर्व विधायक रामेस्वर सिंह यादव, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव, रामेश्‍वर यादव के एक भाई जिनका नाम मालूम नहीं, राम मूर्ती, रेखा यादव, किताब श्री, मुन्नी देवी और पूर्व लेखपाल राम खिलाड़ी के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 323, 344, 347, 386, 447, 506, व 3(2)(5) एससी एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज करवाया था. जिसमें ये कहा गया है कि 2010 से 2014 के बीच उक्त लोगों द्वारा वादी और उसके भाई पर उनकी ज़मीन बेचने का दवाब बनाया गया. रामेश्‍वर सिंह यादव ने अगस्त 2014 में वादी और उसके भाई को एक महीने तक बंधक बनाए रखा और मारपीट की. इस दौरान जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर मौत का भय दिखाकर जबरन इनकी ज़मीन का बैनामा करवा लिया था. उसने कहा है कि उसके पास ज़मीन होते हुए भी आज वो सड़क पर रेहड़ी लगाकर कपडे बेंचने को मजबूर हैं.

जब न्यायालय ने इस मामले मे सुनवाई की और वादी को भी समन भेजकर बुलाया गया तो वादी रामेश्‍वर दयाल हाईकोर्ट में हाजिर हो गया. इस बीच जब मुक़दमें की सुनवाई शुरू हुई तो जज साहब ये देखकर आश्चर्य चकित रह गए कि वादी बिना किसी सुरक्षा के वहा तक पहुंचा है और अभी तक पुलिस ने उसको सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई हैं. उसी सामान्य न्यायाधीश ने एटा पुलिस को इस मामले के वादी को सुरक्षा मुहैया करवाने के आदेश दिए. इस मामले मे अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी. आदेश के अनुपालन में ही एटा के एसएसपी उदय शंकर सिंह ने वादी रामेश्‍वर दयाल को दी सुरक्षा कर्मी उसकी रेहड़ी पर उपलब्ध करवा दिए जहां पर सड़क पर रेहड़ी लगाकर रामेश्‍वर दयाल ठेले पर रेडीमेड गारमेंट्स के कपडे बेचते हैं.

जैसे ही वादी रामेश्‍वर दयाल की रेहड़ी के पास एटा पुलिस के दो शास्‍त्र सुरक्षा कर्मी हथियार लेकर पहुंचे तो रामेश्‍वर दयाल पहले तो उनको ग्राहक समझ कर खड़ा हो गया. बाद में उसको बताया गया कि उसकी सुरक्षा में दोनों सुरक्षा कर्मी हाईकोर्ट के आदेश से लगे हैं तो वाह असहज हो गया. उसने कहा कि हम गरीब आदमी हैं हम सुरक्षा कर्मी नहीं रख सकते. तब उसको बताया गया कि उसको ये दोनों सुरक्षाकर्मी निःशुल्क उसकी सुरक्षा के लिए मिले हैं.

इस सम्बन्ध मे थाना जैथरा के इंस्पेक्टर डॉ सुधीर राघव ने बताया कि माननीय न्यायालय ने एसएसपी एटा को वादी रामेश्‍वर दयाल को समुचित सुरक्षा उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था. उसी आदेश के अनुपालन मे एसएसपी एटा ने मुझे थाना स्तर से सुरक्षा उपलब्ध करवाने को आदेशित किया. एसएसपी एटा के आदेश के 2 घंटे के भीतर वादी रामेश्‍वर दयाल को दो शास्‍त्र सुरक्षाकर्मी तत्काल उपलब्ध करवा दिए गए हैं. तब से दोनों वादी की सुरक्षा मे तैनात हैं. अब रामेश्‍वर दयाल के एटा जनपद के जैथरा कस्बे मे चर्चे हैं. लोग आते जाते सड़क पर रेहड़ी लगाकर कपडे बेंच रहे हैं. रामेश्‍वर दयाल पर दो सरकारी सुरक्षा कर्मी देखकर आचार्य चकित हो रहे है एवं एक दूसरे से इसकी चर्चा भी कर रहे हैं.

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