लखनऊ की दुर्गापूजा: विसर्जन के बाद मूर्ति का बेस वापस ले आता है बंगाली क्लब, जानें इस अनोखी परंपरा की वजह

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रिपोर्ट: अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहार उत्सव की तरह होते हैं. और दुर्गापूजा की बात तो एकदम निराली है. दुर्गापूजा के मौके पर लोगों का उत्साह तो सिर चढ़कर बोलता है. यूपी की राजधानी लखनऊ में भी दुर्गापूजा का उत्साह जबर्दस्त दिखता है. यहां के बंगाली क्लब में 1914 से अब तक लगातार दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है. लखनऊ की सरजमीं पर इसी बंगाली क्लब से दुर्गापूजा शुरू हुई थी.

इस बंगाली क्लब की दुर्गापूजा की सबसे रोचक बात यह है कि यहां बनने वाली मूर्ति की लकड़ी का बेस 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. दरअसल, हर साल मां दुर्गा की प्रतिमा एक ही लकड़ी के बेस पर बनती है और वह बेस सदियों पुराना है. हर साल मूर्ति विसर्जन के बाद लकड़ी का वह बेस काटकर ले आया जाता है. फिर उसे पूरे बहुत संभाल कर रखा जाता है. अगले साल फिर उसी बेस पर मां देवी विराजमान होती हैं.

मुकुट रखने की अनोखी परंपरा

बंगाली क्लब ने अपनी स्थापना के बाद से ही मां दुर्गा के प्रति अपनी आगाध श्रद्धा की वजह से उनके नए मुकुट को सालभर के लिए सुरक्षित रखना शुरू किया था. यानी मूर्ति विसर्जन से पहले मां दुर्गा का मुकुट क्लब के लोग अपने साथ ले आते थे और साल भर पहले मां दुर्गा के उतारे गए मुकुट के साथ मूर्ति विसर्जन किया करते थे. इस परंपरा का निर्वहन आज भी यहां किया जाता है. दरअसल, लकड़ी का बेस सुरक्षित रखना हो या सालभर के लिए मुकुट, इसके पीछे क्लब के लोगों की अपनी आस्था है. वे कहते हैं जिस बेस पर मां के चरण पड़े हैं, वह मां के आशीर्वाद के तौर पर बंगाली क्लब में रहे और लोगों को आदिशक्ति मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता रहे. यानी इस बेस या मुकुट के होने से मां की मौजूदगी का अहसास हमेशा होता रहता है.

क्लब परिसर में ही मूर्ति विसर्जन

बंगाली क्लब की स्थापना 1892 में हुई थी. बंगाली क्लब के वर्तमान अध्यक्ष अरुण कुमार बैनर्जी ने बताया कि यह क्लब और यहां की पूजा दोनों ऐतिहासिक हैं. उन्होंने बताया कि 1 अक्टूबर से यहां दुर्गापूजा भव्य तरीके से आयोजित की जाएगी. हिंदू-मुस्लिम सभी यहां आकर कार्यक्रमों में भाग लेते हैं. सुबह 9:00 बजे से पूजा शुरू होगी. उसके बाद मां को भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया जाएगा. लखनऊ का पूरा बंगाली समाज यहीं पर आता है. उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद से ही परिसर में विसर्जन की व्यवस्था कर ली गई है, तो यहीं पर विसर्जन भी होगा.

धुनुची नाच भी होगा

बंगाली क्लब का सबसे आकर्षण का केंद्र धुनुची नाच है. इसका आयोजन रात में किया जाएगा. मां दुर्गा के पट नवरात्र के छठे दिन खुलेंगे. दशमी को मूर्ति विसर्जन होगा.

Tags: Durga Pooja, Lucknow news, UP news



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