लखनऊ विश्वविद्यालय से आयुर्वेद और यूनानी संकाय हुआ खत्म, अब नहीं लिया जाएगा दाखिला

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अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने यहां से दो संकाय आयुर्वेद और यूनानी को खत्म कर दिया है. इन दोनों संकायों को महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है. इस साल से इसमें एडमिशन नहीं लिए जाएंगे. नए सत्र से महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के जरिए इसमें छात्र प्रवेश ले पाएंगे. लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद से दोनों संकाय को आयुष विश्वविद्यालय से जोड़ने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है.

लखनऊ विश्वविद्यालय से आयुर्वेद और यूनानी संकाय हटने के बाद मेडिकल से जुड़ी शिक्षा के रूप में सिर्फ फार्मेसी ही यहां पर बचा है, जो अभी हाल में ही शुरू हुआ है. आयुष विधा की पढ़ाई करने वाले सभी विद्यार्थियों को अब आयुष विश्वविद्यालय की ही डिग्री मिलेगी. इसके साथ ही राज्य के सभी आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथ के सरकारी और गैर सरकारी कॉलेजों को आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जा रहा है. आयुर्वेदऔर यूनानी के एक-एक सरकारी और 10 निजी कॉलेज लखनऊ विश्वविद्यालय से संचालित होते थे.

यह है प्रमुख वजह
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता दुर्गेश श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक दोनों संकाय लखनऊ विश्वविद्यालय में चल रहे थे. यहां पर परीक्षाएं होती थीं और डिग्री भी छात्र-छात्राओं को लखनऊ विश्वविद्यालय की ही मिलती थी, लेकिन जब गोरखपुर में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की शुरुआत हुई तब राज्य सरकार की ओर से आदेश आया था कि जितने भी आयुष संकाय हैं सभी कॉलेज इस विश्वविद्यालय से जोड़ दिए जाएं.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदेश का पालन करते हुए ही दोनों संकाय को यहां से खत्म कर के महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय से जोड़ दिया गया है. राज्य सरकार के इस फैसले से छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा.

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