लेदर और ईएमवी समेत 5 पार्क बनाएगी यमुना अथॉरिटी, जानें प्लान

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नोएडा. कारोबार करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है. जल्द ही यमुना अथॉरिटी (Yamuna Authority) 5 और नए इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाने जा रही है. अगर सब कुछ ठीकठाक चला तो आने वाली बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा. यह इंडस्ट्रियल क्लस्टर अथॉरिटी के सेक्टर-10 में बनाए जाएंगे. नए इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनने से बड़ी संख्या में रोजगार के रास्ते खुलेंगे. गौरतलब रहे कि 5 इंडस्ट्रियल क्लस्टर (Industrial Cluster) पर पहले से ही काम चल रहा है. जिसमे से 4 क्लस्टर के लिए तो जमीन का आवंटन भी हो चुका है. खास बात यह है कि कारोबारियों को जमीन खरीदने संबंधित कारोबार से जुड़े संसाधन के लिए मोटी रकम भी खर्च नहीं करनी होगी. अथॉरिटी इसके लिए फ्लैटेड फैक्ट्री सिस्टम (Flatted Factory System) पर कारोबार करने का मौका भी देगी.

यह 5 नए इंडस्ट्रियल कलस्टर बनेंगे यमुना अथॉरिटी में

यमुना अथॉरिटी से जुड़े अफसरों की मानें तो सभी 5 नए इंडस्ट्रियल कलस्टर 200 एकड़ जमीन पर बसाए जाएंगे. इंडस्ट्रियल कलस्टर में लेदर पार्क, प्लास्टिक पार्क, हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट पार्क, इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल पार्क और ट्रांसपोर्ट पार्क शामिल होंगे. जबकि इससे पहले जिन 5 इंडस्ट्रियल कलस्टर पर काम चल रहा है उसमे अपैरल, एमएसएमई, हैंडीक्राफ्ट, टॉय सिटी पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क शामिल है.

जरूरी कार्रवाई के बाद चार पार्क को जमीन भी आवंटित कर दी गई है. अभी सिर्फ मेडिकल डिवाइस पार्क को ही जमीन नहीं मिल पाई है. उम्मीद है कि जल्द ही मेडिकल पार्क को भी जमीन का आवंटन कर दिया जाएगा. अथॉरिटी का यह भी कहना है कि अगर नए 5 इंडस्ट्रियल कलस्टर में कारोबारियों की संख्या बढ़ती है तो जमीन का दायरा भी बढ़ा दिया जाएगा.

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इस तरह के कारोबार में होता है फ्लैटेड फैक्ट्री का इस्तेमाल  

जानकारों की मानें तो फ्लैटेड फैक्ट्री का कॅन्सेप्ट विदेशी है. इसके तहत फ्लैटनुमा बहुमंजिला इमारतों का निर्माण किया जाता है. इमारत के हर फ्लोर पर काम के हिसाब से स्ट्राक्चर तैयार किया जाता है. जैसे जूता सिलाई, रेडीमेड गारमेंट, इलेक्ट्रॉनिक-इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट, हैंडीक्राफ्ट, फैशन डिजाइन, आईटी सेक्टर से जुड़े केपीओ, बीपीओ, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डिजाइनिंग, असेंबलिंग की छोटी फैक्ट्रियां आदि. खास बात यह है कि फ्लैटेड फैक्ट्रियों में काम से जुड़े जरूरी संसाधन पहले से ही स्थापित होते हैं.

संसाधनों के साथ किराए पर मिल जाती है फैक्ट्री

जानकारों की मानें तो फ्लैटेड फैक्ट्री कॉन्सेप्ट से ऐसे कारोबारी भी कारोबार शुरु कर सकते हैं जिनके पास कम पूंजी है. ज़मीन खरीदने और फैक्ट्री बनवाने से लेकर उसका स्ट्राक्चर तक तैयार कराने लायक लागत नहीं है.ऐसे में फ्लैटेड फैक्ट्री कॅन्सेप्ट बहुत ही काम आता है. इसके तहत अपने काम के हिसाब से फैक्ट्री में पहले से तैयार फ्लोर किराए पर लेकर काम शुरु किया जा सकता है.इस कॅन्सेप्ट से ज़मीन और फैक्ट्री के लिए मोटी रकम का इंवेस्टमेंट नहीं करना होता है. प्रोजेक्ट के हिसाब से फ्लैटेड फैक्ट्री में स्ट्राक्चर तैयार मिल जाता है. अच्छी बात यह भी है कि इस तरह की फैक्ट्री किराए पर भी मिल जाती हैं.

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Tags: Electric Vehicles, Industrial units, Yamuna Authority



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