लोक कलाकारों के लिए डिजिटल मंच तैयार करेगा संस्कृति विभाग, सतपाल महाराज ने दिए निर्देश

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पिछले दिनों कुछ संस्कृति कर्मियों ने मंत्री से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था.

संस्कृति विभाग (Culture Department) लोक कलाकारों से छोटी-छोटी डाक्यूमेंट्री भी बनवा रहा है. महाराज कोरोना काल में भी संस्कृति कर्मियों से ऑनलाइन मीटिेंग करते रहे हैं.

रांची. कोरोना काल (Corona Era) ने सबकुछ बदल दिया. भीड़- भाड़ भरे आयोजन से अब हर कोई दूरी बना रहा है और इसका सबसे ज्यादा असर पर लोक कलाकारों पर पड़ा है. इससे सांस्कृतिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक संध्याएं ठप सी हो गई हैं. नतीजा लोक कलाकारों (Folk Artists) के आगे आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. प्रदेश के संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज (Culture Minister Satpal Maharaj) इससे चिंतित हैं. सतपाल महाराज चाहते हैं कि लोक कलाकारों की ऑनलाइन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए भी एक मंच हो. इसके लिए मंत्री ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे एक ऐसा मंच तैयार करें, ताकि लोक कलाकार अपनी ऑनलाइन प्रस्तुतियां दे सकें. और दर्शक इसका आनंद उठा सकें.

अपनी समस्याओं से अवगत कराया था
संस्कृति विभाग लोक कलाकारों से छोटी-छोटी डाक्यूमेंट्री भी बनवा रहा है. महाराज कोरोना काल में भी संस्कृति कर्मियों से ऑनलाइन मीटिेंग करते रहे हैं. दूसरी ओर संस्कृति विभाग में लोक कलाकारों के लंबित पड़े भुगतान को लेकर भी मंत्री ने नाराजगी जाहिर की है. मंत्री ने लोक कलाकारों की शिकायत पर  महानिदेशक संस्कृति विभाग आशीष चौहान को आदेशित किया है कि लोक कलाकारों के मानदेय समेत लंबित पड़े यात्रा बिलों का तत्काल भुगतान किया जाए. लोक कलाकारों ने 2019-20 तक के सांस्कृतिक कार्यक्रमों और यात्रा बिलों का  भुगतान न होने की शिकायत की थी. पिछले दिनों कुछ संस्कृति कर्मियों ने मंत्री से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया था.

दो-दो हजार रूपए की आर्थिक मदद भी दी गई थीमंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि कोविड काल में लोक कलाकारों की आर्थिक स्थिति पर भी काफी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. इसलिए उनके पिछले सभी देयकों का भुगतान जल्द से जल्द कर दिया जाए. संस्कृति विभाग में संस्कृति कर्मियों के करीब 274 ग्रुप रजिस्टर्ड हैं. प्रत्येक ग्रुप में बीस कलाकार होते हैं. कोरोना काल में संस्कृति विभाग की ओर से प्रति कलाकार करीब दो हजार आठ सौ कलाकारों को दो-दो हजार रूपए की आर्थिक मदद भी दी गई थी.








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