विदेशी पक्षी भी भारत आकर इस तरह होते हैं बर्ड फ्लू का शिकार!, पक्षी विशेषज्ञ N. Shiv Kumar का खुलासा

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पानी के ऊपर से उड़ान भरते विदेशी पक्षी.

हमारे यहां नदी (River), तालाब और झीलों के किनारे कैसे हालात हैं, वायु प्रदूषण (Air Pollution) का हाल भी किसी से छिपा नहीं है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 13, 2021, 4:37 PM IST

नई दिल्ली. बर्ड फ्लू (Bird Flu) की चपेट में आकर देशभर में लाखों पक्षी दम तोड़ चुके हैं. इसमे एक बड़ी संख्या कौए और मुर्गे-मुर्गियों (Poultry) की भी है. सर्दियों के मौसम में भारत आने वाले विदेशी पक्षियों को भी इसके लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है. सोशल मीडिया (Social Media) पर भी इसकी चर्चा हो रही है. लेकिन देश के जाने-माने पक्षी विशेषज्ञ एन. शिव कुमार का खुलासा इसे बारे में कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है. उनके मुताबिक भारत आने के बाद विदेशी पक्षी (Migrant Bird) खुद बर्ड फ्लू के तेज़ असर की चपेट में आते हैं.

एन. शिव कुमार ने न्यूज18 हिंदी को बताया, “यह संभव है कि भारत में बर्ड फ्लू विदेशी पक्षियों की वजह से फैलता है. होता ऐसा है कि जब विदेशी पक्षी भारत में आता है तो उसके अंदर बर्ड फ्लू का स्ट्रेन होता है. लेकिन यह बहुत ही कमजोर होता है. विदेशी पक्षी जहां से आते हैं वहां हवा और पानी का प्रदूषण नाम मात्र का है. लेकिन हमारे यहां नदी, तालाब और झीलों के किनारे कैसे हालात हैं, वायु प्रदूषण का हाल भी किसी से छिपा नहीं है.

तो होता वही है कि जब विदेशी पक्षी इन दो तरह के प्रदूषण की चपेट में आता है तो उसका बर्ड फ्लू वाला स्ट्रेन ताकतवर हो जाता है और पक्षी फ्लू की चपेट में आने के साथ ही इसे फैलाता भी है. और फिर एक विदेशी पक्षी सैकड़ों किमी दूर से आता है, अगर वो बर्ड फ्लू से पीड़ित हुआ तो इतना लंबा सफर तय ही नहीं कर पाएगा.”

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संजय लेक में मरी बत्तख लेकिन सूरजपुर में नहीं

एन. शिव कुमार का कहना है कि संजय लेक में बत्तख मर गईं. क्योंकि वहां का पानी प्रदूषित है. जबकि ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में अभी तक एक भी पक्षी के मरने की कोई सूचना नहीं है. इसी तरह से जेवर में बने वेटलेंड से भी पक्षियों के मरने की कोई खबर नहीं है. क्योंकि संजय लेक के मुकाबले यहां पानी ज़्यादा साफ है. वहीं गौत्तमबुद्ध नगर में वन विभाग के डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर (डीएफओ) प्रमोद कुमार ने भी बताया कि अभी तक हमारे इलाके में किसी भी पक्षी के बर्ड फ्लू की वजह से मरने की कोई खबर नहीं है.

बोतुलीनुम बैक्टीरिया से भी ऐसे ही मरते हैं पक्षी

पक्षी और जीव विशेषज्ञ एन.शिव कुमार याद करते हुए बताते हैं, बीते एक साल पहले सांभर झील में करीब 20 हज़ार से भी ज़्यादा पक्षियों की मौत हुई थी. इनकी मौत के पीछे एक बड़ी वजह बोतुलीनुम बैक्टीरिया था. यह एक प्रकार का ज़हर होता है. बोतुलिज्म अशक्त करने वाली एक बीमारी है, जो क्लॉस्ट्रीडियम बोतुलीनुम नामक बैक्टीरिया से फैलता है. वैसे तो कोई भी पक्षी इस बीमारी का शिकार हो सकता है, लेकिन बतख, कलहंस, हंस, सारस, बगुला और हवासील इसके ज्यादा शिकार होते हैं.

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वैसे तो पानी में पड़ी वस्तुओं के सड़ने से यह बैक्टीरिया पैदा होता है, लेकिन कुछ मात्रा में बोतुलीनुम बैक्टीरिया पानी में हमेशा मौजूद रहता है. लेकिन जब पानी ज्यादा गंदा हो जाता है तो इनकी संख्या बढ़ जाती है. तब पानी में रहने वाले पक्षियों को ये प्रभावित करने लगता है.


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