सबसे युवा ग्रैंडमास्टर अभिमन्यु ने विश्व चैम्पियन कास्परोव से सीखा है शह-मात का खेल, हैरी पॉटर भी है पसंद

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नई दिल्ली. भारतीय मूल के 12 साल के अमेरिकी शतरंज खिलाड़ी अभिमन्यु मिश्रा (Abhimanyu Mishra) ने दो दिन पहले सबसे युवा ग्रैंडमास्टर(Chess Youngest Grandmaster) बन इतिहास रच दिया था. न्यू जर्सी में रहने वाले अभिमन्यु (12 साल, 4 महीने और 25 दिन) दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने. अभिमन्यु ने बुडापेस्ट में आयोजित ग्रैंडमास्टर टूर्नामेंट में भारतीय ग्रैंडमास्टर लियॉन मेनडोंका (Leon Mendonca) को हराकर ये उपलब्धि हासिल की. उनसे पहले यह रिकॉर्ड रूस के सर्गेई कर्जाकिन (12 साल और 7 महीने) के नाम था, जिन्होंने यह कारनामा साल 2002 में किया था.

अभिमन्यु का ग्रैंडमास्टर बनने तक का सफऱ भी कमाल का रहा है. वो बचपन से ही चेस खेल रहे हैं. सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिता ने उनका इस खेल से पहली बार परिचय कराया था. वो खुद भी कॉलेज और कॉरपोरेट लेवल पर चेस खेल चुके थे. बचपन में जिगसॉ पजल हल करते-करते कब अभिमन्यु चेस के खेल में रच-बस गए, परिवार को पता ही नहीं चला.

आठ साल की उम्र में अभिमन्यु पूर्व विश्व चैम्पियन गैरी कास्परोव के यंग स्टार प्रोग्राम का हिस्सा बने और यहां से उन्हें शह-मात के इस खेल की बारीकियों का पता चला और धीरे-धीरे उनका खेल निखरता गया और वो 12 साल 4 महीने और 25 दिन की उम्र में सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए.

अभिमन्यु 2 साल की उम्र से जिगसॉ पजल हल कर रहा

अभिमन्यु ने बचपन में ही ये दिखा दिया था कि उनमें चेस चैम्पियन बनने के सभी गुण मौजूद हैं. उनकी मां स्वाती शर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब अभिमन्यु दो साल का था, तब हम उसके लिए 40 पीस का जिगसॉ पजल लाए थे. जिसे उसने बहुत कम वक्त में हल कर दिया गया था. पांच साल की उम्र आते-आते तो वो 300 पीस का जिगशॉ पजल हल करने लगा था.

अभिमन्यु शतरंज के मोहरों को हाथी, घोड़े के रूप में पहचानता है

उन्होंने आगे बताया कि हमने अभिमन्यु को कभी भी चेस के चैम्पियन खिलाड़ी के रूप में नहीं देखा. हम बस यही चाहते थे कि उसकी धीरे-धीरे इस खेल में रूचि विकसित हो. लेकिन हमारी उम्मीद से उलट उसे तो इस खेल में काफी मजा आने लगा. वो आज भी शतरंज के मोहरों को हाथी, घोड़े और ऊंट के हिसाब से ही जानता है. उन्होंने इससे जुड़ा एक किस्सा बताया कि एक बार अभिमन्यु ने एक टूर्नामेंट में भाग लिया और शतरंज की चाल लिखना नहीं जानता था, तो आयोजकों ने उसके खेलने पर सवाल उठाए. तब पिता हेमंत ने आयोजकों से उसे खेलने की अनुमति देने के लिए बहस भी की थी.

फुर्सत में अभिमन्यु वीडियो गेम खेलता है

अभिमन्यु की मां स्वाति ने आगे बताया कि वो भले ही अंतरराष्ट्रीय या ग्रैंडमास्टर बन गया हो. लेकिन वो भी दूसरे बच्चों की तरह है. चेस से जब भी फुर्सत मिलती है तो वीडियो गेम खेलकर खुद को तरोताजा करता है. उसे हैरी पॉटर की किताबें भी काफी पसंद है. इसके बारे में खुद अभिमन्यु ने बताया कि बुडापेस्ट आने से पहले मैंने न्यूजर्सी में हैरी पॉटर की किताब पढ़नी शुरू की थी. लेकिन मैं उसे यहां नहीं ला पाया. अब विश्व कप के बाद मेरा अलग असाइनमेंट यही बुक होगी.

एक बार घर जल्दी लौटने के चक्कर में मैच छोड़ दिया था

इतना ही नहीं, मां ने अभिमन्यु से जुड़ा एक और किस्सा सुनाया जब उसका एक मैच आधी रात बीत जाने के बाद भी खत्म नहीं हुआ था तो उसने अपने से ज्यादा उम्र के प्रतिद्वंद्वी को ड्रॉ की पेशकश की थी. एक बार तो अभिमन्यु सिर्फ इसलिए एक मैच छोड़कर आ गया था कि क्योंकि रात हो गई थी और उसे ये डर सता रहा था कि अंधेरा हो गया और उसे वापस घर भी लौटना है.

विश्वनाथन आनंद को रोल मॉडल मानता है अभिमन्यु

विश्व चैम्पियन मैग्नस कार्लसन के अलावा अभिमन्यु पांच बार के विश्व चैम्पियन विश्वनाथन आनंद को भी अपना रोल मॉडल मानते हैं और उनके खेल पर बारीक नजर रखते हैं. उन्हें आनंद के उन मुकाबलों की पूरी जानकारी है, जिसमें वो कड़े संघर्ष के बाद जीते थे. दिलचस्प बात ये है कि विश्वनाथंन आनंद 18 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे. वहीं, शतरंज की दुनिया में राज कर रहे मैग्नस कार्लसन ने 13 साल चार महीने की उम्र में ये उपलब्धि हासिल की थी. उस लिहाज से अभिमन्यु की ये कामयाबी बेहद खास है. वो 2019 में सबसे युवा अंतरराष्ट्रीय ममास्टर बने थे. तब उन्होंने भारत के आर प्रग्गनानंद( 10 साल, 9 महीने, 20 दिन)  का रिकॉर्ड तोड़ा था.

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