सहारनपुर का एकमात्र दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर है विशिष्ट, सैकड़ों साल पुराना है इतिहास

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निखिल त्यागी

सहारनपुर. प्राचीन सनातनी संस्कृति को समेटे श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े का सहारनपुर मेन रेलवे रोड पर स्थित बाकी हनुमान मंदिर अपने आप में बेहद विशिष्ट और अनोखा है. आजादी से कई दशक पहले बने इस मंदिर की प्राचीनता की गवाही यहां स्थित कुआं और खामोश खड़ा विशाल पीपल का पेड़ देता है. समय-समय पर जूना अखाड़े के सनातनी नियमों अनुसार होने वाले अनुष्ठान और कार्यक्रम श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर के आकर्षण को और बढ़ाते हैं.

मंदिर के महंत श्री नरेंद्र गिरी जी ने बात करने पर मंदिर के प्राचीन इतिहास के बारे में बताया. उन्होंने दक्षिण मुखी बजरंग बली के मंदिर की विशेषताओं को साझा किया. महंत जी ने बताया कि स्वच्छ चित्त और मन से सात मंगलवार कामना करने वाले भक्तों की मनोकामना बजरंग बली पूर्ण करते हैं. ऐसा मंदिर में आने वाले कई भक्तगण अनुभव कर बताते हैं.

प्राचीण हनुमान मंदिर की अनोखी दास्तां

सहारनपुर रेलवे स्टेशन के पास बना सैकड़ों साल पुराना यह मंदिर अपने आप में एक अनोखी दास्तां समेटे हुए है. जूना अखाड़े के इस मंदिर में प्राचीन कुआं है. यहां जूना अखाड़े के संतों की समाधि है. साथ ही मंदिर के भीतर बाबा भैरो की प्राचीन गुफा भी है. जहां बाबा की मूर्ति स्थापित है. सैकड़ों साल पुराना यह मंदिर सहारनपुर का एकमात्र दक्षिण हनुमान मंदिर है.

मंदिर में मौजूद प्राचीन पीपल का पेड़ और एक कुआं है. मान्यता है जो भी व्यक्ति इस कुएं का पानी पीता है और इसे ले जाकर अपने घर पर चढ़ाता है उस पर कभी किसी टोना-टोटका का असर नहीं होता.
अनिल गिरी जी महाराज ने बताया यह जूना अखाड़े का मंदिर है यहां साधु संत आकर तपस्या करते हैं.

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