सिंघु बॉर्डर: लोहड़ी के मौके पर प्रदर्शनकारी किसानों ने जलाईं कृषि कानूनों की प्रतियां

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प्रदर्शनकारी किसानों ने लोहड़ी पर जलाईं कृषि कानूनों की प्रतियां (Photo-ANI)

Farm Laws: कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने बुधवार को लोहड़ी के मौके पर सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई. लोहड़ी के दिन लोग लकड़ियां इकट्ठी करके जलाते हैं और सुख एवं समृद्धि की कामना करते हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 13, 2021, 6:22 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ पिछले करीब डेढ़ महीने से दिल्ली की सीमा (Delhi Border) पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बुधवार को लोहड़ी (Lohri) के मौके पर नए कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध व्यक्त किया. पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन लोग लकड़ियां इकट्ठी करके जलाते हैं और सुख एवं समृद्धि की कामना करते हैं. विभिन्न संगठनों से नाता रखने वाले किसानों ने सिंघु और टिकरी बॉर्डर पर कानूनों की प्रतियां जलाईं. किसानों ने उनकी मांगें ना मानने को लेकर भाजपा नीत केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की. उन्होंने नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग भी की.

प्रदर्शन कर रहे 40 किसान संगठनों का शीर्ष संगठन ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने आगे की रणनीति तय करने के लिए बुधवार दोपहर बैठक भी की. किसान संगठनों ने मंगलवार को कहा था कि वे उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की तरफ से गठित समिति के समक्ष पेश नहीं होंगे और आरोप लगाया कि यह ‘‘सरकार समर्थक’’ समिति है. किसान संगठनों ने कहा कि उन्हें तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है. उन्होंने तीन कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाए जाने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया. हालांकि समिति के सदस्यों की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया है.

सुप्रीम कोर्ट ने किया है चार सदस्यीय समिति का गठन
उच्चतम न्यायालय ने तीन नये कृषि कानूनों को लेकर केन्द्र सरकार और दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे रहे किसान संगठनों के बीच व्याप्त गतिरोध खत्म करने के इरादे से मंगलवार को इन कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगाने के साथ ही किसानों की समस्याओं पर विचार के लिये चार सदस्यीय समिति का गठन किया था.

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हजारों किसान केन्द्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल 28 नवम्बर से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हैं. इस साल सितम्बर में अमल में आए तीनों कानूनों को केन्द्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश किया है. उसका कहना है कि इन कानूनों के आने से बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेच सकेंगे.

दूसरी तरफ, प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों का कहना है कि इन कानूनों से एमएसपी का सुरक्षा कवच और मंडियां भी खत्म हो जाएंगी तथा खेती बड़े कॉरपोरेट समूहों के हाथ में चली जाएगी.








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