सैन्य कमांडो का जोधपुर में अंतिम संस्कार, मां और पत्नी के साथ हजारों लोगों ने नम आंखों से दी विदाई

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जोधपुर. शहर के कायलाना (kaylana jheel) में सात दिन पूर्व हेलिकॉप्टर (helicopter) से कूदने के बाद डूबे कैप्टन (caption) अंकित (ankit gupta) का अंतिम संस्कार (general) जोधपुर (jodhpur) में ही सैन्य क्षैत्र स्थित डिगाड़ी गांव के श्मशान घाट पर किया गया. कैप्टन को आखिरी विदाई पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई. कैप्टन अंकित के परिजनों ने जोधपुर में ही अंतिम संस्कार की इच्छा व्यक्त की थी. अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद हज़ारों लोगों के आंसू छलक पड़े. मां अपने बेटे और पत्नी अपने पति को चिता के धुंआ में ब्रम्हलीन होते देख आंसुओं में सैलाव में डूबती चली गईं.

इधर आज सुबह उनके शव का पोस्टमार्टम महात्मा गांधी अस्पताल में किया गया था. पोस्ट मार्टम के पश्चात पार्थिव देह को 10 पैरा के मुख्यालय ले जाया गया. वहां उनके साथी जवानों व अधिकारियों ने उन्हें अंतिम सलामी देकर विदा किया. डिगाड़ी गांव में उन्हें विदाई देने के लिए सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ा पड़ा.

छह दिन के सर्च ऑपरेशन के बाद मिला था शव

कायलाना में छह दिन तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद सेना को कल 10 पैरा के बेहतरीन कमांडो रहे कैप्टन अंकित का शव खोज निकालने में सफलता मिली थी. शव को बाहर निकाल मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया. वहां से आज सुबह महात्मा गांधी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया. पोस्ट मार्टम के दौरान सेना के जवानों ने मोर्चरी की तरफ का रास्ता पूरी तरह से बंद कर उस तरफ का आवागमन तक रोक दिया.ACB की बड़ी कार्रवाई: दौसा और बांदीकुई SDM 5-5 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार

सेना के कड़ी सुरक्षा घेरे में पार्थिव देह को एक सुसज्जित सैन्य वाहन में रख 10 पैरा मुख्यालय पहुंचाया गया. यहां पर उनके साथी कमांडो ने उन्हें अश्रुपूरित आंखों से अंतिम सलामी दी. इस दौरान कैप्टन अंकित के परिजन लगातार साथ रहे. रातानाडा स्थित 10 पैरा के मुख्यालय से पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए सैन्य क्षेत्र से सटेे डिगाड़ी गांव के श्मसान स्थल ले जाया गया है.

परिजनों ने जताई जोधपुर में ही दाह संस्कार की इच्छा

कैप्टन अंकित का शव लगातार छह दिन तक पानी में डूबा रहा. इस कारण शरीर बहुत गल गया. परिजनों ने भारी मन से कल देर रात ही सेना को जोधपुर में ही दाह संस्कार करने की अपनी इच्छा से अवगत करवा दिया था. इसके बाद आज दोपहर में तीन बजे सेना ने दाह संस्कार की पूरी तैयारी की.

भाई ने दी मुखाग्नि, पत्नी और मां की का छलका दर्द

आज अंतिम संस्कार के दौरान गुड़गांव से उनके कुछ परिजन भी आकर सम्मिलित हुए. कैप्टन अंकित गुप्ता के माता-पिता, भाई, पत्नी, बहन, सास-ससुर सहित कुछ लोग अंतिम संस्कार के दौरान शमशान में मौजूद थे. उनके परिवार के लगभग 12 से 15 परिजन अंतिम संस्कार के समय मौजूद थे. जब उनके भाई ने उनको मुखाग्नि दी तो उनकी मां तथा पत्नी गले से लिपटकर रो पड़ी. इसे देखकर मौजूद सेना के अधिकारी तथा जवान भी अपनी आंखों से आंसुओं को गिरने से नहीं रोक पाए. पूरे अंतिम संस्कार के दौरान मां अपने लाल और पत्नी अपने पति को ब्रम्हलीन होते एकटक देखते रहे.

श्मशान में कड़ी सुरक्षा का था बंदोबस्त 

अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों ने शमशान को पूरी तरह से सील करके रखा हुआ था. किसी भी असैन्य व्यक्ति को श्मशान में प्रवेश नहीं करने दिया गया. यहां तक कि शमशान के आसपास स्थित मकानों की छतों पर भी सेना के जवान तैनात थे.

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युवाओं में दिखा गजब का जोश

कैप्टन अंकित गुप्ता के अंतिम संस्कार के दौरान जब उन्हें शमशान ले जाया जा रहा था तो बड़ी संख्या में युवा हाथों में तिरंगा लिए गगनभेदी नारे लगाते हुए उनके साथ चलते दिखाई दिए. युवाओं की एक बड़ी फौज उनके अंतिम यात्रा में सम्मिलित हुई, लेकिन किसी को भी श्मशान में प्रवेश नहीं दिया गया. अंतिम संस्कार के बाद कई किलोमीटर तक युवा भारत माता की जय तथा “जब तक सूरज चांद रहेगा अंकित तेरा नाम रहेगा” के नारे लगाते हुए सड़क पर पैदल जाते हुए दिखाई दिए.

ऐसे हुआ था हादसा

पैरा कमांडो स्पेशल फोर्सेज का पूरे साल अभ्यास चलता रहता है. डेजर्ट वारफेयर में महारत रखने वाली 10 पैरा के कमांडो को एक हेलिकॉप्टर से पहले अपनी बोट को पानी में फेंक स्वयं भी कूदना था. इसके बाद उन्हें बोट पर सवार होकर दुश्मन पर हमला बोलना था. इस अभियान के तहत कैप्टन अंकित के नेतृत्व में 4 कमांडो ने कायलाना जलाशय में गुरुवार को पहले अपनी नाव को फेंका और उसके बाद खुद भी पानी में कूद पडे. तीन कमांडो तो नाव पर पहुंच गए, लेकिन कैप्टन अंकित नहीं पहुंच पाए. कल दोपहर में उनका शव पानी से बाहर निकाला जा सका था.

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