हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष बोले- अभी तक उनके पास नहीं पहुंचा विधायक अभय चौटाला का इस्तीफा

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हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता

ज्ञान चंद गुप्ता (Gyan Chand Gupta) ने कहा कि अभय चौटाला (Abhay Chautala) इस्तीफे के नाम पर केवल राजनीति कर रहे हैं.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 14, 2021, 12:20 PM IST

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता (Gyan Chand Gupta) को अभी तक इनेलो के विधायक अभय चौटाला (Abhay Chautala) का इस्तीफा नहीं मिला है. विधानसभा अध्यक्ष ने खुद इस बात की पुष्टि की है. वहीं उन्होंने कहा कि इस्तीफा सशर्त नहीं दिया जाता बल्कि विधानसभा आकर दो लाइन लिखकर देनी होती है. विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि अभी तक मेरे पास उनका इस्तीफा नहीं आया है, उन्होंने यह भी कहा कि जो भी सदस्य विधानसभा से इस्तीफा देना चाहता है, उसे स्पष्ट तौर पर लिखना होता है कि मैं विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं. इसमें केवल इतने ही शब्द चाहिए.

गुप्ता बोले राजनीति कर रहे अभय

गुप्ता ने कहा कि आजकल कम्युनिकेशन के बहुत सारे तरीके हैं. अगर स्पष्ट तौर पर लिखकर आएगा, तो उसे मान लिया जाएगा. गुप्ता ने कहा कि अभय चौटाला इस्तीफे के नाम पर केवल राजनीति कर रहे हैं. अगर उन्हें इस्तीफा ही देना है तो विधानसभा आकर बिना किसी कारण के उन्हें सौंपें.

विधानसभा में मुझे मेरी मौजूदगी का कोई महत्व नहीं लगताबता दें कि अभय चौटाला ने इस्तीफे में लिखा था कि अगर 26 जनवरी 2021 तक किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए. अभय चौटाला ने चिट्ठी में कहा अब तक आठ दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन सरकार ने कानून वापस लेने पर कोई सहमति नहीं जताई है. अभय ने कहा इस प्रकार की परिस्थितियों में विधानसभा में मुझे मेरी मौजूदगी का कोई महत्व नहीं लगता. अभय ने चिट्ठी में खुद को चौधरी देवी लाल की विरासत का रखवाला बताया.

कृषि कानूनों को रद्द किया जाए

अभय चौटाला ने कहा था कि पिछले डेढ़ माह से किसान अपनी मांगों को लेकर इस भयंकर ठंड व बारिश के मौसम में डटे हुए हैं. लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही. इन तीन कृषि कानूनों को बनाने से पहले किसी भी किसान संगठन से राय नहीं ली गई और ना ही किसी किसान संगठन ने ऐसे बिलों को लाने की मांग की थी. सरकार केवल पूंजीपतियों को लाभ पहुंचने के लिए जीएसटी में तो संशोधन कर देती है लेकिन किसानों की मांग के बावजूद इन तीन कानूनों को रद्द नहीं किया जा रहा.


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