हिमाचल के इस युवा वैज्ञानिक प्रभात ने बनाया ऐसा ड्रोन, जिसका देश ने माना लोहा

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धर्मशाला. स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर प्रतियोगिता (Indigenous Microprocessor Competition)में हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)से एकमात्र प्रतिभागी इनोवेटर और उद्यमी प्रभात ठाकुर ने फाइनल में जगह बना ली है. इस प्रतियोगिता में देश भर से करीब 6169 कंपनियों ने भाग लिया था. इसमें प्रभात ठाकुर ने 18वें नंबर पर आकर फाइनल में जगह बना कर कांगड़ा जिले के साथ-साथ प्रदेश का नाम रोशन किया है.

एक ओर जहां आईआईटी (IIT) और बड़ी-बड़ी कंपनियों ने इसमें भाग लिया है, तो वहीं दूसरी ओर प्रभात ठाकुर व्यक्तिगत रूप से अकेले अपनी इनोवेशन से इन संस्थानों को टक्कर दे कर फाइनल में पहुंचे हैं. फाइनल में आने पर केंद्र सरकार की ओर से प्रभात ठाकुर को चार लाख रूपए की राशि बतौर ईनाम दी गई है और उनकी कंपनी को भी स्टार्ट अप (Start Up) के तहत लाया गया है.

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रतियोगिता
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस प्रतियोगिता का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्राद्यौगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics And Information Technology) की ओर से करवाया जा रहा है. स्वदेश में विकसित माइक्रोप्रोसेसर शक्ति के लिए प्रतिभागियों को कोई नई तकनीक इनोवेट करने का चैलेंज दिया गया था. स्वदेशी प्रोसेसर का प्रयोग करते हुए प्रतिभागियों को अपना हार्डवेयर प्रोटोटाइप विकसित करना है. इसका उद्देश्य देश में इनोवेशन और रिसर्च तथा स्टार्ट अप को बढ़ावा देना है.

चार लाख का इनाम मिला, फाइनल में जीते तो मिलेंगे 25 लाख
इस प्रतियोगिता के तहत प्रथम चरण में देश भर से 6169 कंपनियों और संस्थानों में भाग लिया था, जिसमें से दूसरे चरण में 100 प्रतिभागियों का चयन किया गया और उन्हें एक लाख रुपए की राशि बतौर इनाम दी गई. 100 प्रतिभागियों में से चार लाख रुपए की इनामी राशि के साथ 30 प्रतिभागी फाइनल में पहुंचे हैं. अंतिम चरण में टॉप 10 प्रतिभागियों को चुना जाएगा और केंद्र सरकार की ओर से उन्हें 25 लाख रुपए राशि बतौर इनाम दी जाएगी.

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