हिमाचल में जहां बना था खिचड़ी पकाने का गिनीज रिक़ॉर्ड, वहां इस बार नहीं होगा मकर संक्राति मेला

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जनवरी 2020 में तत्तापानी में खिचड़ी बनाई गई थी. (File Photo)

Tattapani Makar Sakranti Fair: सरकार ने अभी तक 50 लोगों से ज्यादा इकट्ठे होने की अनुमति नहीं दी है. इस बार यह मेला आयोजित नहीं किया जाएगा. कोरोना के चलते भीड़ एकत्र करने पर रोक है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 14, 2021, 9:29 AM IST

शिमला. हिमाचल प्रदेश के मंडी (Mandi) जिले के तत्तापानी में इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति मेला नहीं मनाया जाएगा. इस बार मेला कोरोना की भेंट चढ़ गया है. हर वर्ष मकर संक्रांति पर तत्तापानी (Tattapani) में लोहड़ी का मेला होता था और बड़ी संख्या में यहां दूर-दूर से लोग आकर स्नान करते हैं. साथ ही तुला दान भी करवाते थे.

ऐसा मानना है कि यहां पर स्नान करने से चर्म रोग खत्म हो जाते हैं. बीते साल जनवरी में यहां पर विशालकाय पतीले में 1995 किलो खिचड़ी बनाई गई थी, जिसे की गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Geniuses Book of Records ) में भी दर्ज किया गया था. इस बार कोरोना महामारी के चलते यह मेला आयोजित नहीं किया जाएगा.

हिमाचल में जहां बना था खिचड़ी पकाने का गिनीज रिक़ॉर्ड, वहां इस बार नहीं होगा मकर संक्राति मेला

विश्व रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट सीएम जयराम ठाकुर को सौंपा गया था. (File Photo)

क्यों नहीं पकेगी खिचड़ीसरकार ने अभी तक 50 लोगों से ज्यादा इकट्ठे होने की अनुमति नहीं दी है. इस बार यह मेला आयोजित नहीं किया जाएगा. कोरोना के चलते भीड़ एकत्र करने पर रोक है. बता दें कि 92 साल में यहां पहली बार है कि मेले का आयोजन नहीं होगा और खिचड़ी नहीं पकेगी.

बीते साल बना था रिकॉर्ड
बीते वर्ष मकर संक्रांति के पावन अवसर पर एक ही बर्तन में 1995 किलोग्राम खिचड़ी पकाने का विश्व रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज हुआ था. सवा सात फीट चौड़े, चार फीट ऊंचे बर्तन में 25 शेफ की मदद से पांच घंटे में इस खिचड़ी को तैयार किया गया. विशाल पतीले का वजन क्रेन की मदद से उठाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधि की मौजूदगी में किया गया था और विश्व रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट सीएम जयराम ठाकुर को सौंपा गया था.

हरियाणा से लाया गया था पतीला

एक ही बर्तन में 25 कुक लगाए गए जिसमें 15 विशेष शेफ थे. हरियाणा की मशहूर मार्केट जगाधरी से खिचड़ी के लिए एक बड़ा पतीला मंगाया गया था. इसमें लिए एक ईंट की एक विशेष भट्टी बनाई गई थी. पांच घंटे तक खिचड़ी पकने के बाद क्रेन की मदद से विशाल पतीले को भट्टी से उतारा गया.


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