हिसार: 3400 का रेमडेसिविर 40 हजार में बेचने वाले चाचा-भतीजा गिरफ्तार, 3 इंजेक्शन व नकदी बरामद

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नकली रेमडेसिविर भी बाजार में बेचे जा रहे हैं. (File pic)

Hisar News: पुलिस को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की शिकायत मिली थी. वे स्वयं व डेंटल सर्जन डा. तरुण खुराना पुलिस की टीम में शामिल हुए.

हिसार. पुलिस ने शनिवार रात रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remedicivir Injection) की कालाबाजारी करते हुए कमिस्ट हॉलसेल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजीव खुराना के भाई मुल्तानी चौक निवासी अरुण खुराना और भतीजे पार्थ खुराना को गिरफ्तार (Arrest) किया है. दोनों को रविवार को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है. पुलिस ने मामले में रेडिंग पार्टी तैयार कर अरुण खुराना व गाड़ी चालक पार्थ खुराना को गाड़ी सहित काबू कर 3 रेमडेसिविर इंजेक्शन और 40,000 रुपए बरामद किए. बरामद रेमडेसिविर इंजेक्शन, 40000 रुपए और गाड़ी को कब्जे में लेकर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ औषधि एवम् प्रशाधन अधिनियम/ आपदा प्रबंधन अधिनियम/ आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा आईपीसी की धारा 420/34 के तहत केस दर्ज किया है. मामले में सीनियर ड्रग कंट्रोलर रमन श्योराण की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है. पुलिस को दी शिकायत में रमन श्योराण ने बताया कि उन्हें पुलिस से रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की शिकायत मिली थी. वे स्वयं व डेंटल सर्जन डा. तरुण खुराना पुलिस की टीम में शामिल हुए. इसके बाद दो लोगों को 40 हजार रुपये की नकदी देकर फर्जी ग्राहक बनाकर होली हेल्प अस्पताल की दवा की दुकान से इंजेक्शन लाने के लिए भेजा. दुकान में बैठे युवक पार्थ खुराना ने कहा कि उसके चाचा ही इस बारे में कुछ बता पाएंगे. इसके बाद मेडिकल पर उसके चाचा अरुण खुराना आए. उन्हाेंने मोलभाव के बाद 40 हजार रुपये में रेमडेसिविर इंंजेक्शन दिलाने का दावा किया. इसके बाद उन्होंने पार्थ को इंजेक्शन लाने के लिए भेज दिया. कुछ समय के बाद पार्थ कार लेकर अस्पताल के पास आया और 40 हजार रुपये में एक इंजेक्शन उन्हें बेच दिया. इसके बाद बोगस ग्राहक द्वारा ईशारा मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उससे से भी दो इंजेक्शन बरामद हुए. पहले मना किया फिर सौदा करने के लिए हो गया राजी.रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए आरोपित ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान पहले थोड़ी ना नुकुर की. इसके बाद अरुण ने एक व्यक्ति का फोन लगाया. इसके बाद उन्होंने कहा कि माइल कंपनी के इंजेक्शन के 45 हजार रुपये लेगा. मोलभाव करने पर वह 40 हजार रुपये में देने को तैयार हो गया. टीम ने जब 40 हजार रुपये में इंजेक्शन खरीदने के लिए हां कहा तो आरोपी ने अपने भतीजे पार्थ को जहाज पुल के पास इंजेक्शन लाने के लिए भेजा आधे घंटे के बाद वह इंजेक्शन लेकर आ गया. इसके बाद टीम उनको रुपये देकर इंजेक्शन खरीद लेती है और फिर ईशारा मिलने पर पुलिस की टीम दोनों को गिरफ्तार कर लेती है. बीते कई दिनों से चल रही इंजेक्शन की कालाबाजारी रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी जब से कोरोना के केस बढ़े है तब से चल रही है. इससे पहले भी रेमेडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले सामने आए है. हाल ही में एक निजी अस्पताल में ऑक्सीजन ना मिलने से दम तोड़ने वाले पांच कोरोना संक्रमितों को भी रेमेडेसिविर इंजेक्शन लगाया गया था. उस दौरान एक मरीज से अस्पताल ने अपने स्तर पर इंजेक्श्न का प्रबंध करने पर उससे लिखित में इस मामले में खुद ही जिम्मेदार होने की बात लिखवाई थी. दम तोड़ने वाले सभी मृतकों को रेमेडेसिविल इंजेक्शन लगा था, लेकिन मरीजों के स्वजनों में से किसी ने 27 हजार में तो किसी ने 31 हजार में एक इंजेक्शन खरीदा था. कुल 6 इंजेक्शन लेने के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च करने की बात सामने आई थी.



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