100 साल का सफर और 55 वैरायटी: लोग यूं ही नहीं हैं मेरठ के रामचंद्र सहाय रेवड़ी-गजक वाले के दीवाने

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रिपोर्ट- विशाल भटनागर

मेरठ. सर्दियों के मौसम में अगर आपने मेरठ की रेवड़ी और गजक का स्वाद नहीं चखा, तो मानिए सब कुछ अधूरा ही है. हम यह बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ में मिलने वाली रेवड़ी-गजक का स्वाद आपको कहीं और नहीं मिलेगा. उसमें भी गुड़ और तिल की गजक की लोगों की खास डिमांड रहती है. यही कारण है कि मेरठ ही नहीं बल्कि आसपास के शहरों के साथ-साथ अन्य राज्य में भी बड़ी मात्रा में गोल गजक सप्लाई की जाती है.

NEWS 18 LOCAL से खास बातचीत करते हुए रामचंद्र सहाय रेवड़ी गजक वाले संदीप रेवड़ी ने बताया कि करीब 100 साल पहले रामचंद्र सहाय द्वारा गोल गजक की शुरुआत की गई थी. तब से लेकर अब तक यह रेवड़ी गजक विशेष पहचान बनाए हुए हैं. उन्होंने बताया कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक के लिए हर तरह की गजक यहां तैयार की जाती है, लेकिन सबसे ज्यादा अगर किसी गजक की डिमांड रहती है तो वह गोल वाली गजक होती है. यह खास गुड़ और तिल की बनी हुई होती है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि गुड़ की गजक के लिए बिना मिलावट वाले गुड़ को ही लाया जाता है. इसके बाद अन्य चीजें मिलाकर तिल और गुड़ के मिश्रण से गजक तैयार की जाती है.

55 तरह की मिलती है गजक
मेरठ की इस दुकान पर एक-दो या 10-20 नहीं बल्कि 55 तरह की गजक तैयार की जाती है. जैसे मलाई गजक, आगरा गजक, गजक रोल, चीनी की गजक, गुड़ की गजक, तिल की गजक, गोल गजक आदि विशेष रूप से बनाई जाती हैं. बता दें कि राजनीतिक गलियारों में भी मेरठ की गजक की काफी चर्चा रहती है. मेरठ के नेता भी अगर इधर उधर जाएं, तो वह भी यहां की गजक को ही पैक करा कर ले जाते हैं. अगर आप भी इस मशहूर गजक का लुत्‍फ उठाना चाहते हैं, तो आपको मेरठ के बुढ़ाना गेट (नीयर जिमखाना ग्राउंड) इलाके में जाना होगा. यहां हर आइटम की कीमत अलग अलग है.

Tags: Meerut news, Street Food, UP news



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