18 हजार पन्नों की चार्जशीट, पूर्व मंत्री बाली की भूमिका नहीं, आरोपियों की हैंडराइटिंग मैच – News18 Hindi

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शिमला. हिमाचल प्रदेश में 18 साल पहले हुए एचआरटीसी कंडक्टर भर्ती घोटाले में News 18 के पुख्ता सूत्रों ने बड़ा खुलासा किया है. अब तक की जांच में पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली की भूमिका नहीं पाई गई है, हालांकि मामले की जांच अब भी जारी है. अब तक की पुलिस जांच में बाली के हस्ताक्षर तक नहीं मिले हैं. एक महत्वपूर्ण खबर ये भी है कि जिन मैरिट संबंधित दस्तावेजों में कटिंग पाई गई है और कहीं ओवर राइटिंग पाई गई हैं वो हैडराइटिंग आरोपी अधिकारियों की ही है.

फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है. हाल ही में शिमला पुलिस को मिली एफएसएल रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है कि ये हैंडराइटिंग उन्हीं आरोपी अधिकारियों की है. जहां अभ्यर्थी को नंबर दिए गए हैं, उनमें भी कई जगह कटिंग पाई गई है. बता दें कि घोटाले का पता इस तरह से चला कि कंडक्टर के 300 पद ही विज्ञापित किए गए थे लेकिन भर्ती 378 की हुई. इसमें 23 ऐसे अभ्यर्थी पाए गए हैं, जिनको बिना इंटरव्यू दिए ही नौकरी मिल गई.

चार साल से चल रही जांच

शिमला पुलिस मामले की जांच में पिछले 4 सालों से जुटी हुई है लेकिन अब तक आरोप पत्र तैयार नहीं कर पाई है. जीएस बाली की संलिप्तता को लेकर भी जांच की जा रही है, लेकिन अब तक ऐसा कुछ उनके खिलाफ हाथ नहीं लगा है, लेकिन जांच अभी जारी है, जिसमें कुछ और खुलासे होने की उम्मीद है. हालांकि, जुलाई 2019 में पुलिस ने दावा किया था कि करीब 18 हजार पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई है. अब जानकारी मिली है कि आरोप पत्र के कागज 8 बोरियों में बंद हैं, लेकिन चार्जशीट को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है.

क्या कहती है पुलिस

इस मामले पर डीएसपी कमल वर्मा ने News 18 से बातचीत में कहा कि कंडक्टर भर्ती मामले की जांच चल रही है, काफी लंबी इन्वेस्टिगेशन है, इसलिए फिलहाल इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना जरूर है कि जांच जल्द पूरी जाएगी. आरोप पत्र दायर करने में देरी को लेकर डीएसपी ने कहा कि ये लंबा प्रोसेस होता है, जिसमें कई कड़ियां जुड़ी होती हैं, ये कहना मुश्किल है कि कब आरोप पत्र दायर किया जाएगा.

जल्द पूरी होगी जांच:पुलिस

इस मामले में करीब एक दर्जन लोगों से पूछताछ होना बाकी है, जिनमें कुछ संदिग्ध हैं और अभ्यर्थी हैं. पुलिस जांच जल्द पूरी करने का दावा तो कर रही है लेकिन जांच का जिम्मा मात्र 3 कर्मियों को सौंपा गया है. बता दें कि तत्कालीन वीरभद्र सरकार के दौरान हुई इस भर्ती के मामले पर ये जांच चल रही है. इस मामले पर एक पूर्व आईएएस समेत 5 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें एक की मौत हो चुकी है. पुलिस सूत्र बता रहे हैं कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटा लिए गए हैं. यह साक्ष्य उन्हें दोषी साबित करने के लिए काफी हैं.

300 पद भरे जाने थे

2 अगस्त 2003 को HRTC के निदेशक मंडल की एक बैठक होटल होलीडे होम में हुई, जिसमें कंडक्टरों 300 पद भरने को मंजूरी दी गई. इसके तहत सामान्य वर्ग के 166, ओबीसी के 54, SC के 66 और ST के 14 पद भरे जाने थे. 23 सिंतबर को ये विज्ञापित किए गए. 18 जनवरी 2004 को 17 हजार 890 अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा दी, जिसमें से 14 हजार 107 अभ्यर्थियों ने 50 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किए. 1 जून 2004 को डिवीजन लेवल पर साक्षात्कार हुए.

इसलिए हुआ विवाद

यह भर्ती विवादों में तब आई जब परिणाम सामने आया. आरोप यह लगा कि केवल 300 पद विज्ञापित किए गए थे, लेकिन 378 पद भरे गए. 78 पद बिना विज्ञापन के ही भरे गए. बिलासपुर के रहने वाले एक व्यक्ति ने इस पर सवाल उठाए थे और शिकायत दर्ज करवाई थी. इस मामले की जांच सबसे पहले डीएसपी वीरेंद्र कालिया ने की थी और 19 जुलाई 2012 को एक जांच रिपोर्ट विजिलेंस ने तत्कालीन मुख्य सचिव को सौंपी थी. रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी प्रकिया में मैरिट जानबूझकर डिवीजन वाइज बनाई गई.

बाली के इलाके से सबसे ज्यादा लगे

हिमाचल प्रदेश में एक ही मैरिट लिस्ट बननी चाहिए थी. सबसे ज्यादा 147 कंडक्टर धर्मशाला डिवीजन से चयनित किए गए. इनमें से तत्कालीन परिवहन मंत्री जीएस बाली के विधानसभा क्षेत्र नगरोटा बगवां से 73 चुने गए थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र रोहड़ू से 35 लोगों का चयन किया गया था.

इन पर हुआ केस

इस मामले पर 14 मार्च 2017 को शिमला के सदर थाने में IPC की धारा 420, 120-बी और सेक्शन 13(a) के तहत तत्कालीन एमडी दलजीत सिंह डोगरा, डीएम धर्मशाला एचके गुप्ता, डीएम हमीरपुर एसपी छेतारजी, डीएम शिमला मथुरा दास शर्मा और डीएम रिंगचिंन नेगी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. उसके बाद एसआईटी का गठन किया गया.

23 अभ्यर्थी बिना इंटरव्यू के रखे

सूत्रों की मानें तो मैरिट संबंधित दस्तावेजों में कटिंग पाई गई है. कहीं ओवर राइटिंग हैं, जहां अभ्यर्थी को नंबर दिए गए हैं, उनमें भी कई जगह कटिंग पाई गई है. 23 ऐसे अभ्यर्थी पाए गए हैं, जिनको बिना इंटरव्यू दिए नौकरी मिल गई. 10 जुलाई 2019 को हिमाचल हाईकोर्ट ने भर्ती घोटाले के आरोपी एचआरटीसी के मुख्य महाप्रबंधक एचके गुप्ता को सशर्त अग्रिम जमानत दी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है. सीजीएम एचके गुप्ता साल 2003-04 में हुई कंडक्टर भर्ती मामले में आरोपी हैं. वे इन भर्तियों के दौरान धर्मशाला में डीएम के पद पर तैनात रहे. कंडक्टर भर्तियों के लिए भर्ती बोर्ड डिविजन स्तर पर बनाए गए थे.

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