2018 में जब भारत की जीत से शुरू हुई थी सेपक टकरा चर्चा, जानिए क्या है यह खेल

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सेपक टकरा को किक वॉलीबॉल भी कहा जाता है

सेपक टकरा (Sepak Takraw) की शुरुआत एशिया (Aisa) में हुई औऱ यहीं के देश इसमें अपना वर्चस्व रखते हैं

नई दिल्ली. साल 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स (Asian Games) में जब भारत ने ब्रॉन्ज मेडल जीता तब पहली बार देश में सेपक टकरा  (Sepak Takraw)  की चर्चा हुई. बहुत कम ही लोग इस खेल के बारे में पहले से जानते थे. ओलिंपिक में शामिल सेपक टकरा  (Sepak Takraw) उन खेलों में शामिल है जिसमें एशियन देश अपना वर्चस्व रखते हैं. आज हम आपको इसी खेल के बारे में बताएंगे. सेपक टकरा को भारत मे ंकिक वॉलीबॉल (Kick Volleball) भी कहा जाता है. यह खेल दरअसल वॉलीबॉल और फुटबॉल को मिश्रण हैं.

एशिया में हुई थी खेल की शुरुआत
इस खेल का ज़िक्र 14वीं शताब्दी के Malacca Sultanate में मिलता है. वर्तमान में इसे मलेशिया के नाम से जाना जाता है. उसी समय से ये गेम पूरे दक्षिण एशिया में फैल गया था. मलेशिया में इसे Sepak और थाईलैंड में Takraw कहा जाता है. मलय भाषा में Sepak का मतलब होता है ‘किक’ और थाई भाषा में Takraw को ‘बॉल को मारना’. चूंकी इन दोनों देशों का ही इस खेल में दबदबा है, इसलिए इसका नाम सेपक टकरा रख दिया गया.  इस खेल को अलग-अलग जगह अलग-अलग नामों से जाना जातै ह. मलेशिया में इसे सेपक रागा या टकरा कहा जाता है. वहीं थाईलैंड में इस केवल टकरा बलोते हैं. म्यांमार में इसे चिन कहचे हैं वही फिलिपींस में इसे सिपा कहा जाता है.

खेल के जरूरी नियमसेपक टकरा खेल बैडमिंटन कोर्ट जैसे दिखने वाले कोर्ट में ही खेला जाता है. इस कोर्ट की लंबाई 13.40 मीटर और चौड़ाई 6.19 मीटर होती है. कोर्ट दो भाग में बांटने वाली लाइ दो सेंटीमीटर की होती है. इस खेल की गेंद में 12 छेद होते हैं और यह सिनथेटिक फाइबर की बनी होती है. गेंद की सर्कमफ्रेंस 0.42 से 0.44 के बीच होता है वहीं इसका वजन महिलाओं में 170-180 के बीच औऱ महिलाओं के लिए 150-160 के बीच होता है. खिलाड़ी टी शर्ट और शॉर्ट्स में मैच खेलते हैं कप्तान अपनी बाजों पर कप्तान का बैन लगाकर रखता है.

इसमें दो टीमें खेलती हैं. प्रत्येक टीम अपने 3 मजबूत खिलाड़ियों को खेलने के लिए मैदान में उतारती है. इसे भारत में किक वॉलीबॉल या पैरों से खेली जाने वाली वॉलीबॉल भी कहते हैं. इसे वॉलीबॉल की तरह ही खेला जाता है लेकिन खेलते वक़्त हाथों का इस्तेमाल नहीं किया जाता. खिलाड़ी प्लास्टिक से बनी एक बॉल को पैर, घुटने, सिर और छाती की मदद से मारकर विरोधी के पाले में पहुंचाते हैं. मैच तीन सेटों का होता है. पहले दो सेट 21 पॉइंट्स के होते हैं. अगर दोनों टीमें एक-एक सेट जीत जाती हैं, तो 15 पॉइंट्स का तीसरा और फाइनल सेट भी खेला जाता है, जिसे ‘टाईब्रेक’ कहते हैं.

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भारत ने पहली बार 2018 मे ंजीता कोई पदक
भारत इस खेल में कबी ओलिंपिक में मडल नहीं जीत पाया है. हालांकि उसने इस खेल के इतिहास में अपना पहला मेडल 18वें एशियन गेम्स में जीता था जब  पुरुष रेगू टीम स्पर्धा में जीता था. भारत की पुरुष रेगू टीम गत विजेता थाइलैंड से 0-2 से हार गई था. लेकिन उसने कांस्य जीता क्योंकि सेमीफाइनल में हारने वाली दोनों टीमों को पदक दिया जाता है. यह भारत का एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में जीता गया पहला पदक है.


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