66 हजार बेटियों का पिता बना ये बनारस का ये शख्स, पढ़ें- काशी के संतोष की अनूठी कहानी

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अभिषेक जायसवाल/वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi) के सन्तोष ओझा दुनिया के सबसे अनोखे पिता में से एक हैं. एक दो नहीं बल्कि बनारस (Banaras) के इस शख्स की अब 66 हजार बेटियां हैं, जिनके मोक्ष के लिए ये पितृपक्ष की नवमी तिथि को मोक्ष की नगरी काशी (Kashi) में श्राद्धकर्म करते हैं.  ये वो बेटियां हैं जिनके अपनों ने ही उनकी गर्भ में हत्या कर दी है. ऐसी अजन्मी बेटियों को मोक्ष मिले. इसके लिए आगमन सामाजिक संस्था के सन्तोष ओझा पिछले 9 सालों से ऐसी बेटियों के लिए उनके पिता बन कर उनका श्राद्ध करते हैं. उन्होंने जब इसके लिए पहल की थी तो उनके घर वालों ने ही उनका विरोध किया लेकिन इन सब के बाद भी उन्होंने इस अनूठे अनुष्ठान की शुरुआत की.

बता दें कि केन्द्र सरकार भी बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ (Beti Bachao Beti Padhao) अभियान को लेकर लगातार अभियान चला रहे हैं. आगमन समाजिक संस्था का ये पवित्र अनुष्ठान भी पीएम के इस अभियान को आगे ले जा रहा है और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहा है.

पांच ब्राह्मणों ने कराया अनुष्ठान
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर पांच वैदिक ब्राह्मणों द्वारा इस अनुष्ठान को कराया गया.अनुष्ठान की शुरुआत शांति पाठ से हुई फिर वैदिक ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारणके बीच पूरे विधि विधान से इस अनूठे अनुष्ठान को पूरा कराया. आगमन सामाजिक संस्था के सचिव सन्तोष ओझा ने बताया कि ये वो अजन्मी बेटियां हैं जिनके अपनों ने ही उन्हें दुनिया में आने से पहले गर्भ में मार दिया है.ऐसी बेटियों के मोक्ष के लिए संस्था 9 सालों से ये अनुष्ठान करा रही है और अब तक कुल 66 हजार बेटियों का श्राद्धकर्म किया है.

शास्त्रों में है विधान
पंडित दिनेश शंकर मिश्रा ने बताया कि शास्त्रों में इसका विधान है. नैमित्तिक श्राद्ध के तहत जिनका कोई होता है उन्हें याद कर उनके नाम से श्राद्ध कर्म करने से उन्हें भी मोक्ष की प्राप्ति होती है.काशी को मोक्ष का शहर भी कहा जाता है यही वजह है कि यहां इस अनुष्ठान को कर अजन्मी बेटियों के मोक्ष की कामना की जाती है.

Tags: Uttar pradesh news, Varanasi news



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