40 की उम्र पार करते ही साइलेंट किलर बन सकती हैं दिल की बीमारियां, आज ही नोट कर लें ये 5 जरूरी मेडिकल टेस्ट
आजकल की बिगड़ती लाइफस्टाइल, काम का बढ़ता स्ट्रेस और खानपान की गलत आदतों का सबसे बुरा असर हमारे दिल पर पड़ रहा है। आपने भी पिछले कुछ समय में गौर किया होगा कि अचानक हार्ट अटैक (Heart Attack) आने और जिम या चलते-फिरते कार्डियक अरेस्ट होने के मामले तेजी से बढ़े हैं। पहले जहाँ दिल की बीमारियाँ बुढ़ापे की निशानी मानी जाती थीं, वहीं अब 40 की उम्र पार करते ही इसका जोखिम काफी ज्यादा बढ़ गया है।
अक्सर हाई ब्लड प्रेशर या नसों में ब्लॉकेज के शुरुआती लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते, जिसकी वजह से इन्हें ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स और कार्डियोलॉजिस्ट का मानना है कि 40 के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को ट्रैक करना और समय पर हार्ट स्क्रीनिंग कराना ही आपको किसी बड़े खतरे से बचा सकता है।
आइए जानते हैं उन मुख्य टेस्ट के बारे में जिन्हें 40 की उम्र के बाद हर व्यक्ति को रेगुलर रूटीन में जरूर शामिल करना चाहिए।
1. लिपिड प्रोफाइल टेस्ट (Lipid Profile Test for Cholesterol)
हार्ट ब्लॉकेज और अटैक के खतरे को भांपने के लिए लिपिड प्रोफाइल सबसे बेसिक और जरूरी ब्लड टेस्ट है। यह टेस्ट आपके शरीर में मौजूद कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) के लेवल की जांच करता है।
- क्यों है जरूरी: खून में बढ़ा हुआ एलडीएल (LDL) यानी ‘खराब कोलेस्ट्रॉल’ धमनियों की दीवारों पर जमा होने लगता है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और ब्लॉकेज की नौबत आती है।
- नॉर्मल रेंज: सेहतमंद दिल के लिए कुल कोलेस्ट्रॉल (Total Cholesterol) का स्तर 200 mg/dL से कम होना चाहिए। 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार यह टेस्ट जरूर कराएं।
2. टीएमटी या स्ट्रेस टेस्ट (TMT – Treadmill Test)
ट्रेडमिल टेस्ट (TMT) यह देखने के लिए किया जाता है कि जब आप कोई शारीरिक मेहनत का काम करते हैं, तो आपका दिल उस दबाव को कितना झेल पाता है।
- कैसे होता है टेस्ट: इस टेस्ट के दौरान मरीज को एक ट्रेडमिल पर चलाया या दौड़ाया जाता है और उसी वक्त ईसीजी (ECG) और ब्लड प्रेशर को लगातार मॉनिटर किया जाता है।
- क्या चलता है पता: इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिलती है कि मेहनत करते समय दिल को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई मिल रही है या नहीं। यह टेस्ट नसों में छिपे हुए ब्लॉकेज को पकड़ने का सबसे बेहतरीन जरिया है।
3. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और इकोकार्डियोग्राम (ECG & Echocardiogram)
ये दोनों टेस्ट दिल की धड़कन और उसकी बनावट को समझने के लिए बेहद जरूरी हैं।
- ईसीजी (ECG): यह दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को एक ग्राफ पर रिकॉर्ड करता है। इससे दिल की धड़कन का अनियमित होना (Arrhythmia) या हाल ही में हुए किसी साइलेंट हार्ट डैमेज का तुरंत पता चल जाता है। अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो भी 40 के बाद डॉक्टर की सलाह पर हर 6 महीने या एक साल में इसे करवा सकते हैं।
- इको (Echocardiogram): यह एक तरह का दिल का अल्ट्रासाउंड होता है, जिससे हार्ट की लाइव तस्वीरें स्क्रीन पर दिखती हैं। इसकी मदद से दिल के वाल्व की स्थिति, चैम्बर्स का साइज और दिल की पंपिंग क्षमता (Ejection Fraction) को सटीकता से मापा जाता है।
4. रेगुलर ब्लड प्रेशर मेजरमेंट (Regular Blood Pressure Screening)
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों की सबसे बड़ी और मुख्य वजहों में से एक है।
- क्यों है खतरनाक: लंबे समय तक हाई बीपी रहने से दिल की धमनियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे हार्ट फेलियर, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- नॉर्मल रेंज: एक स्वस्थ वयस्क का सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg होना चाहिए। चूंकि इसके कोई साफ लक्षण नहीं दिखते, इसलिए 40 के बाद घर पर या डॉक्टर के पास नियमित रूप से बीपी चेक करवाते रहें।
5. हाई-सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव प्रोटीन (hs-CRP Test)
यह एक एडवांस ब्लड टेस्ट है जो आपके शरीर के अंदरूनी हिस्सों में होने वाली सूजन (Inflammation) के स्तर को मापता है।
- किसे है जरूरत: जिन लोगों को डायबिटीज है, मोटापा है, जो बहुत ज्यादा स्मोकिंग करते हैं या जिनके परिवार में पहले से किसी को दिल की बीमारी रही है (Family History), उनके लिए यह टेस्ट बहुत जरूरी है।
- क्या है फायदा: दिल की नसों के अंदर होने वाली सूजन ही आगे चलकर प्लाक या ब्लॉकेज का रूप लेती है। hs-CRP का बढ़ा हुआ लेवल आपको हार्ट अटैक के आने वाले खतरे के प्रति पहले ही अलर्ट कर देता है।
40 की उम्र के बाद सेहत को लेकर की गई एक छोटी सी लापरवाही भी पूरे परिवार पर भारी पड़ सकती है। इन टेस्ट्स के जरिए समय रहते किसी भी बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़कर लाइफस्टाइल और दवाओं की मदद से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। याद रखें, प्रिवेंशन हमेशा इलाज से बेहतर होता है।
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