Allahabad lawyer against setting up of High Court benches in Meerut and Agra nodelsp

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प्रयागराज. केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू (Kiren Rijiju) के बयान को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकीलों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) बार एसोसिएशन (bar Association) ने हाईकोर्ट की बेंच मेरठ या आगरा में गठित करने के फैसले का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील मंत्री किरण रिजिजू के बयान का जमकर विरोध कर रहे हैं. इस मामले में हाईकोर्ट की निवर्तमान कमेटी की ओर से बुलाई गई आपात बैठक में निवर्तमान कार्यकारिणी को रणनीति तय कर आगे का फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया गया है.

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह ने कहा है कि शुक्रवार शाम को हाईकोर्ट बार ने दोबारा एक बैठक बुलाई है. उस बैठक में आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा है कि यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और दिल्ली में जो उच्च न्यायालय के अधिवक्ता हैं और जो लॉ फर्म हैं उनके द्वारा यह प्रायोजित है. निवर्तमान बार एशोसिएशन अध्यक्ष ने कहा है कि दिल्ली के वकीलों द्वारा यूपी सरकार और हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं को छेड़ने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट की बेंच बनाने का आंदोलन जनता का आंदोलन नहीं है.

उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट के वकील वादकारियों को इस लड़ाई में घसीटना नहीं चाहते हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एशोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह ने कहा है कि निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के 30 फीसदी पद रिक्त हैं, जबकि हाईकोर्ट में 40 फ़ीसदी जजों के पद खाली हैं. उन्होंने कहा है कि सरकार से यह मांग है कि अगर यह पद भर दिए जाएं तो वादकारियों को आसानी से न्याय मिल सकेगा.

उन्होंने कहा है कि जहां तक पश्चिमी यूपी से प्रयागराज वादकारियों के आने में परेशानी का सवाल है तो यह पूरी तरह से निरर्थक है, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक युग में घर बैठे मुकदमे दाखिल किए जा सकते हैं और उनकी जानकारी भी मिल सकती है. उन्होंने कहा है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक और बेंच बनाने का फैसला संविधान के खिलाफ है. यह न्यायिक निर्णयों में भी विविधता को बढ़ावा देना होगा. उन्होंने कहा है कि जब विभिन्न प्रकार के निर्णय होंगे तो उसका दबाव सुप्रीम कोर्ट पर भी पड़ेगा.

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष अमरेन्द्र नाथ सिंह ने कहा है कि केंद्रीय कानून मंत्री का बयान हाईकोर्ट की अस्मिता, अस्तित्व और न्याय व्यवस्था के खिलाफ है. उन्होंने कहा है कि उनके इस बयान से वकील ही नहीं बल्कि वादकारी, व्यवसायी और शिक्षा जगत से जुड़े लोग भी आहत हैं. उन्होंने कहा है कि देश की आजादी के आंदोलन में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण स्थान है. वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र नाथ सिंह ने कहा है कि हाईकोर्ट बार एशोसिएशन की आपात बैठक में केंद्रीय कानून मंत्री के बयान की निंदा की गई और उसका विरोध किया गया.

उन्होंने कहा है कि जसवंत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के बाद उत्तराखंड राज्य बन चुका है, इसलिए अब इसकी आवश्यकता नहीं है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी यूपी में बनाने के खिलाफ विरोध करते हैं और आगे भी करते रहेंगे.

वकीलों के विरोध से सरकार बैकफुट पर

वहीं चुनावी माहौल में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच को लेकर वकीलों के उग्र होने से राज्य सरकार भी बैकफुट पर आ गई है. राज्य सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इस पूरे मामले में सफाई दी है. उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट की नई बेंच का गठन असंभव है. हाईकोर्ट की कोई भी बेंच पश्चिम उत्तर प्रदेश में नहीं बनने जा रही है. उन्होंने कहा है कि पहले भी एक बार इस तरह का मुद्दा उठा था, और एक बार फिर से यह मुद्दा उठा है. उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट की नई बेंच बनाने की प्रक्रिया बहुत लंबी है. उन्होंने कहा है कि उस प्रक्रिया के तहत यूपी की सरकार अभी कोई बेंच बनने की इजाजत नहीं देगी और ना ही भविष्य में ऐसा होने देगी.

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