Approval from Railway Board on 10 year old demand, now railway guard will be called train manager | 10 साल पुरानी मांग पर रेलवे बोर्ड से मिलीमंजूरी, अब ट्रेन मैनेजर कहलाएंगे रेलवे गार्ड

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धनबादएक घंटा पहले

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  • मालगाड़ी के गार्ड अब गुड्स ट्रेन मैनेजर और पैसेंजर के गार्ड का नया पदनाम पैसेंजर ट्रेन मैनेजर
  • गार्ड शब्द पर रेल यूनियनों को थी आपत्ति, पीएनएम मीटिंग में उठता था मुद्दा

ट्रेनाें के सुरक्षित परिचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी निभा रहे गार्डों काे रेल मंत्रालय द्वारा नई पहचान दी गई है। रेलवे में काम करनेवालाें के पदनाम में किए जा रहे बदलाव की प्रक्रिया के तहत इस बार गार्ड काे नई पहचान दी गई है। गार्ड अब ट्रेन मैनेजर के नाम से जाने जाएंगे। इसे लेकर रेल मंत्रालय से मिली मंजूरी के बाद रेलवे बाेर्ड के एक डायरेक्टर पे कमीशन-2 एमके गुप्ता ने सभी जोनल रेलवे में पदनाम बदलने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है।

गार्ड के पदनाम बदले जाने का मामला रेलवे बाेर्ड में साल 2011 से विचाराधीन था। चूंकि अपार्टमेंट, फैक्ट्रियाें के साथ विभिन्न संस्थानाें में तैनात सुरक्षा कर्मियाें को गार्ड नाम से जाना जाता है। इसलिए नेशनल फेडरेशन अॉफ इंडियन रेलवे समेत अन्य यूनियन लगातार इस मुद्दे काे रेलवे बाेर्ड के साथ हाेने वाले पीएनएम की मीटिंग में उठाती रही। अंत: रेल प्रबंधन काे यूनियनाें की मांगाें पर विचार करते हुए पदनाम में बदलाव काे लेकर आदेश जारी किया।

पदनाम में बदलाव काे ऐसे समझें
1900 ग्रेड पे वाले असिस्टेंट गार्ड असिस्टेंट पैसेंजर ट्रेन मैनेजर, 2800 ग्रेड पे वाले गुड्स गार्ड यानी मालगाड़ी के गार्ड गुड्स ट्रेन मैनेजर, 4200 ग्रेड पे वाले सीनियर गुड्स गार्ड सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर, 4200 ग्रेड पे वाले सीनियर पैसेंजर कार्ड सीनियर पैसेंजर ट्रेन मैनेजर और 4200 ग्रेड पे वाले मेल एक्सप्रेस गार्ड मेल एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर कहलाएंगे।

पदनाम के अलावा अन्य कोई बदलाव नहीं
रेलवे बाेर्ड की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार गार्ड के सिर्फ पदनाम में बदलाव किए गए हैं। गार्ड का बाकी सब कुछ यथावत रहेगा। उनके पे लेवल, नियुक्ति की प्रक्रिया, मौजूदा कर्तव्य और अधिकार के अलावा उन्हें मिलने वाली प्रोन्नति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यूनियनाें ने पदनाम बदलने का किया स्वागत
रेलवे बोर्ड से जारी अधिसूचना का नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे के जाेनल सेक्रेटरी पीएस चतुर्वेदी ने स्वागत करते हुए कहा कि गार्ड के पदनाम में बदलाव की मांग साल 2011 से की जा रही थी। ईसीआरकेयू के मीडिया प्रभारी एनके ख्वास ने कहा कि रेलवे बोर्ड स्तर पर कई बार इस मुद्दे को उठाया था।

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