Assembly Govind Dotasara Nathi ka Bada statement dominated in house Chairman gave wonderful answer

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जयपुर. शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के चर्चित (Govind Singh Dotasara) ‘नाथी का बाड़ा’ बयान की गूंज राजस्थान विधानसभा में भी सुनाई दी. सोमवार को विधानसभा में ‘राजस्थान पर्यटन व्यवसाय सुकरकरण एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2021’ पर चर्चा के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ (Rajendra Rathor) ने नाथी का बाड़ा (Nathi ka Bada) का मामला उठाते हुए शिक्षा राज्यमंत्री पर कटाक्ष किया. राठौड़ ने कहा कि इसे पर्यटन स्थल घोषित कर देना चाहिए. इस मुद्दे पर राठौड़ और डोटासरा ने एक दूसरे पर जमकर तंज कसे. डोटासरा ने कहा कि नाथी का बाड़ा राजस्थान में पहले से पर्यटन स्थल है आप जाकर उसे देखकर आइए. दोनों के बीच बहस बढ़ती देख कर सभापति राजेंद्र पारीक ने टोका और कहा कि वे इस सदन को ‘नाथी का बाड़ा’ नहीं बनने देंगे.

खास बात यह है कि इस मुद्दे पर केवल राजेंद्र राठौड़ ही नहीं बल्कि कुल 8 विधायकों ने अलग अलग अंदाज में नाथी के बाड़े का जिक्र किया. बीजेपी विधायक अशोक लाहोटी, वासुदेव देवनानी, मदन दिलावर, ज्ञानचंद पारख और बिहारीलाल ने भी अपने संबोधन में नाथी के बाड़े का जिक्र किया. कुछ दिन पहले तबादला करवाने की मांग को लेकर आए शिक्षकों को शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा था कि मेरा घर को क्या नाथी का बाड़ा समझ रखा है. डोटासरा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था.

विपक्ष के विधायकों ने उठाए सवाल
उधर विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के कई विधायकों ने इस पर अपनी राय रखी. विपक्षी विधायकों ने जहां प्रदेश के पर्यटन नीति पर सवाल उठाए वहीं कहा कि विधेयक की मंशा भिखारियों को परेशान करने की लग रही है. बीजेपी विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि सरकार पर्यटन को लेकर गंभीर नहीं है. सरकार के पास पूर्णकालिक पर्यटन मंत्री ही नहीं है. पहले भिखारियों के पुनर्वास के लिए कानून लाना चाहिए.

ध्वनिमत से पारित हुआ विधेयक
इस विधेयक विधानसभा में चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया गया है. अब लपकों द्वारा अपराध की पुनरावृत्ति संज्ञेय और गैर जमानतीय अपराध की श्रेणी में आएगी. सदन में चर्चा का जवाब देते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि संशोधन लाने की आवश्यकता पर्यटकों को लपकों से सुरक्षित करने के लिए पड़ी. साल 2010 में जब यह कानून पारित किया गया था तब इसमें यह अंकित नहीं था कि ये अपराध संज्ञेय या गैर जमानतीय है या नहीं. अब संशोधित कानून में अपराध की पुनरावृत्ति को गैर जमानतीय और संज्ञेय अपराध माना गया है. डोटासरा ने स्पष्ट किया कि भिखारियों को परेशान करने के लिए यह कानून नहीं है. जब तक यह संज्ञेय अपराध नहीं होगा तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती. हम सब चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक राजस्थान आएं.

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