AYODHYA: जानिए क्या है अयोध्या के स्वर्ण खनी कुंड की पौराणिक मान्यता

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रिपोर्ट- सर्वेश श्रीवास्तव, अयोध्या

अयोध्या. “गंगा बड़ी गोदावरी ना तीर्थराज प्रयाग सबसे बड़ी अयोध्या जहां राम लिहिन अवतार”. यूं तो अयोध्या भगवान राम की जन्मस्थली है. लेकिन इसी अयोध्या में कई प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरें भी मौजूद हैं. उसी ऐतिहासिक धरोहर में प्रसिद्ध है एक ऐसा कुंड.जहां स्वर्ण मुद्राओं की बारिश हुई थी. जी हां, सही पढ़ा आपने स्वर्ण मुद्राओं की ही बारिश हुई थी. दरअसल हम बात कर रहे हैं बड़ी छावनी के बगल में स्थित स्वर्ण खनि कुंड की. जहां चक्रवर्ती राजा रघु के आक्रमण के डर से कुबेर ने स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा की थी.

स्वर्ण खनी कुंड की पौराणिक मान्यता
संत समिति के महामंत्री पवन दास शास्त्री बताते हैं कि पौराणिक कथाओं के अनुसार महाराज रघु ने कोस्य को दान देने के लिए 9 हजार स्वर्ण मुद्राओं का संकल्प लिया था. महाराजा रघु के पास कुछ धन था नहीं. इस नाते कोस्य ने संकोच बस कुछ मांगा नहीं. क्योंकि वह मिट्टी के बर्तन के पास बैठे हुए थे. लेकिन महाराजा रघु ने कहा, यह रघुवंशीओं का दरबार है. यहां कोई भी व्यक्ति जिस किसी इच्छा को लेकर आया है.आज तक वह खाली हाथ नहीं गया है. तब कोस्य ने महाराज से कहा, महाराज मैं सोने की याचना लेकर आया हूं और आप मिट्टी का बर्तन लेकर बैठे हैं. तब महाराज रघु ने संपत्ति के देव कुबेर पर चढ़ाई करने का फैसला लिया और रात्रि में ही रथ को तैयार किया. रथ पर सवार हुए ही थे कि कुबेर को इस बात का पता चला. तब कुबेर ने सोने की वर्षा की जो महाराज रघु ने कोस्य को समर्पित कर दिया. लेकिन कोस्य ने उसमें से 9 हजार स्वर्ण मुद्राएं ही लिया. बाकी वहीं छोड़ दिया. तभी से इस कुंड को स्वर्ण खनी कुंड के नाम से जाना जाता है.

क्या है कुंड का महत्व ?
हिंदू पंचांग के अनुसार इस कुंड में स्नान करने से असीम आनंद की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही ये भी मान्यता है कि, वैशाख माह के 12वें दिन कुंड में स्नान करने से व्यक्ति की कृति में वृद्धि होती है.

जानिए कहां स्थित है स्वर्ण खनी कुंड ?
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप आसानी से इस कुंड पर पहुंच सकते हैं
Swarn Khani Kundhttps://maps.app.goo.gl/DwsRYn4F4Lcr8yaG8
नोट- यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है NEWS 18 LOCAL इसकी पुष्टि नहीं करता

Tags: Ayodhya News, UP latest news



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