AYODHYA: जानिए रामनगरी में क्यों लेटे हुए हैं हनुमान जी, यह इच्छा पूरी होते ही हो जाएंगे खड़े!

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रिपोर्ट: सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या: मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में लगभग 8 हजार मठ-मंदिर हैं. हर मठ मंदिरों की अपनी अलग-अलग मान्यता और अलग-अलग परंपराएं हैं. मंदिर और मूर्तियों की नगरी अयोध्या में ही स्थित एक ऐसा मंदिर है, जहां पवन पुत्र हनुमान निद्रा में लीन हैं, यानी लेटे हुए हैं. तो चलिए बताते हैं कि कहां है यह मंदिर?

दरअसल, राम जन्मभूमि परिसर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित है दशरथ गद्दी. यहां पर विशालकाय पवन पुत्र हनुमान की प्रतिमा लगी हुई है. अयोध्या आने वाले श्रद्धालु लेटे हनुमान जी का दर्शन-पूजन करते हैं. साथ ही जो श्रद्धालु प्रयागराज लेटे हनुमान जी का दर्शन नहीं कर पाते हैं, वह रामनगरी में स्थित लेटे हनुमान जी का अद्भुत दर्शन प्राप्त करते हैं. मंदिर के पुजारी राजकुमार दास बताते हैं कि 1992 में जब बाबरी विध्वंस हुआ था. उसके बाद जमीन का समतलीकरण हुआ तो वहां हनुमान जी की एक मूर्ति खड़ी थी, वहां से हनुमान जी की मूर्ति लाकर यहां लिटा दिया गया. इस मंदिर में उस मूर्ति को इस संकल्प के साथ लिटाया गया था. जब राम मंदिर बनेगा फिर यह मूर्ति खड़ी हो जाएगी. तब से लेकर आज तक श्रद्धालु विश्राम मुद्रा में हनुमान जी का दर्शन कर रहे हैं.

इस समय खुलता है मंदिर का कपाट
दशरथ गद्दी में स्थित लेटे हनुमान जी का मंदिर सुबह 5:00 बजे से लेकर रात्रि 9:00 बजे तक खुला रहता है. जहां दूर-दराज से श्रद्धालु आकर पवन पुत्र हनुमान का दर्शन पूजन करते हैं

जानिए कब होती है आरती?
लेटे हनुमान जी मंदिर में सुबह 5:00 बजे मंगल आरती और 6:00 बजे शयन आरती होती है.

लेटे हनुमान जी की आरती
दोहा-श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार |बरनौ रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि |बुद्धिहीन तनु जानि के, सुमिरौ पवन कुमार |बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहुं कलेश विकार ||

।।चौपाई।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिंहु लोक उजागर | रामदूत अतुलित बल धामा अंजनि पुत्र पवन सुत नामा || महाबीर बिक्रम बजरंगी कुमति निवार सुमति के संगी | कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडल कुंचित केसा ।। हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे कांधे मूंज जनेऊ साजे | शंकर सुवन केसरी नन्दन तेज प्रताप महा जग बन्दन || विद्यावान गुनी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर| प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया रामलखन सीता मन बसिया |सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा बिकट रूप धरि लंक जरावा |भीम रूप धरि असुर संहारे रामचन्द्र के काज संवारे ||लाये सजीवन लखन जियाये श्री रघुबीर हरषि उर लाये |रघुपति कीन्हि बहुत बड़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई ||सहस बदन तुम्हरो जस गावे अस कहि श्रीपति कंठ लगावें |सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा नारद सारद सहित अहीसा ||जम कुबेर दिगपाल कहां ते, कबि कोबिद कहि सके कहां ते |तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा || तुम्हरो मंत्र विभीषन माना लंकेश्वर भये सब जग जाना |जुग सहस्र जोजन पर भानु लील्यो ताहि मधुर फल जानु ||प्रभु मुद्रिका मेलि मुख मांहि जलधि लांघ गये अचरज नाहिं |दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते || राम दुवारे तुम रखवारे होत न आज्ञा बिनु पैसारे |सब सुख लहे तुम्हारी सरना तुम रक्षक काहू को डरना ||आपन तेज सम्हारो आपे तीन्हू लोक हांक ते कांपे |भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महाबीर जब नाम सुनावे||नासै रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा |संकट ते हनुमान छुड़ावें मन क्रम बचन ध्यान जो लावें||सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा |और मनोरथ जो कोई लावे सोई अमित जीवन फल पावे ||चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा |साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे ||अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन्ह जानकी माताराम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा ||तुम्हरे भजन राम को पावें जनम-जनम के दुख बिसरावें |अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहां जन्म हरि भक्त कहाई ||और देवता चित्त न धरई हनुमत सेई सर्व सुख करई |संकट कटे, मिटे सब पीरा, जपत निरंतरहनुमत बलबीरा ||जय जय जय हनुमान गोसाईं कृपा करो गुरुदेव की नाईं |जो सत बार पाठ कर कोई छूटई बन्दि महासुख होई ||

जो पढ़े हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा |तुलसीदास सदा हरि चेरा,कीजै नाथ हृदय मंह डेरा ||

।।दोहा।।
पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप |राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप

जानिए कहां स्थित हैं लेटे हनुमान जी?
अयोध्या के प्रमुख चौराहा अशर्फी भवन चौराहा से मात्र 200 मीटर दूरी पर स्थित दशरथ गद्दी है जहां लेटे हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप आसानी से पहुंच सकते हैं

Ayodhya Nath Darbar Dashrath Gaddi https://maps.app.goo.gl/dbREb8Ewc8FYYFUu6

Tags: Ayodhya News, Uttar pradesh news



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