Ayush launches 26 traditional ayush food recipes for people to protect from corona and other diseases dlpg

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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी (Corona Pandemic) आने के बाद से लोगों का आयुर्वेद पर भरोसा मजबूत हुआ है. कोरोना ने ही सिखाया कि बीमारियों से लड़ने के लिए इम्‍यूनिटी (Immunity) के मजबूत होने और शरीर में ताकत और तत्‍वों का होना बेहद जरूरी है. यही वजह रही कि कोरोना के दौरान आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) की ओर से लगातार आयुर्वेद, यूनानी, होम्‍योपैथी और प्राकृतिक चिकित्‍सा के तहत गाइडलाइंस आती रही हैं. वहीं अब बीमारियों को दूर भगाने के लिए आयुष की ओर से विशेष फूड रैसिपी (Food Recipe) लांच की गई हैं.

आयुष मंत्रालय के आयुष सिस्‍टम्‍स ऑफ मेडिसिन की ओर से हाल ही में आयुष फूड रैसिपीज (Ayush Food Recipes) लांच की गई हैं. इस बुकलेट में इन रैसिपीज को बनाने की विधि भी बताई गई है ताकि लोग इन्‍हें घर पर ही बनाकर उपयोग कर सकें और बीमारियों से बचाव कर सकें. इन पारंपरिक फूड रैसिपीज (Traditional food Recipes) में आयुर्वेद के तहत आने वाले फल, सब्‍जी या मसालों का इस्‍तेमाल किया गया है.

आयुष ने कुल 26 प्रकार की फूड रैसिपी लांच की हैं. इनमें आमलकी पनाका, आमला स्‍क्‍वैश, गुलकंद, बीटरूट हलवा, बेसन-सूजी पैनकेक विद सीसम चटनी, रागी एंड बनाना स्‍मूदी, पेया, अदरका पका, मधुका लेहा, रसाला, युषा, खलाम, कुलत्‍था रसम, टाकरा, नाइजर सीड्स लड्डू, अपूपम, खर्जूर लड्डू, पंपकिन एंड बिग बीन्‍स स्‍वीट पैनकेक, गूजबेरी स्‍टाइर फ्राई, मामसा रसम, लजरद्राका आदि रैसिपीज शामिल की गई हैं.

इस बारे में आयुष का कहना है कि ये रैसिपीज इसलिए लांच की गई हैं ताकि लोगों को पारंपरिक फूड रैसिपीज के बारे में जानकारी हो सके. ताकि इनके इस्‍तेमाल से न केवल बीमारियों को ठीक करने में मदद मिल सके साथ ही आने वाली बीमारियों की रोकथाम और बचाव के लिए शरीर को जरूरी तत्‍व मिल सकें. इन रैसिपीज की एक बुकलेट बनाई गई है और सभी राज्‍य सरकारों को कहा गया है कि वे इनका प्रचार-प्रसार इस तरह करें कि लोग इन पारंपरिक चीजों को अपनाएं.

बता दें कि कोविड के बाद से आयुष लगातार लोगों से आयुष फूड अपनाने की अपील कर रहा है. जिसमें कई तरह के परंपरागत भोज्‍य पदार्थ शामिल हैं. हालांकि आयुष की ओर से यह भी स्‍पष्‍ट चेतावनी दी गई है कि बिना किसी वैध सलाह के किसी भी पदार्थ, मसाले या का उपयोग लोग आयुर्वेदिक औषधि मानकर अपनी मर्जी से न करें. इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. आयुर्वेद के अनुसार मात्रा का संतुलन काफी जरूरी होता है.

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