Bajoli hydroelectric project danger in Himachal people leaving home in fear nodssp

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चंबा. हिमाचल के चंबा जिला में बन रही 180 मेगावाट बजोली-होली जल विद्युत परियोजना (Bajoli hydroelectric project) प्रभावित इलाके में हाल ही में हुये भूस्खलन और घरों के नुकसान के तथ्यों पर हिमधरा पर्यावरण समूह (Himdhara Samuh ) ने एक फ़ैक्ट फ़ाइंडिंग रिपोर्ट जारी की है. समूह ने हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में बड़ी विकास परियोजनाओं (Developmental Project) के पर्यावरणीय प्रभावों का दस्तावेजीकरण कर रहा है, उसके सदस्यों ने 3-4 जनवरी को चंबा जिला के भरमौर तहसील की होली पंचायत के जढोता गांव का दौरा किया था.

दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में, जल विद्युत परियोजना की सुरंग से हुये रिसाव स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं. खबरों के मुताबिक, जल रिसाव की घटनायें 17 से 19 दिसंबर के आस-पास शुरू हुयीं. इसके लगभग दो हफ्ते बाद रिसाव व भूस्खलन जारी रहा और स्स्थाथानीय जनता का कहना था कि प्रशासन व कंपनी प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए. रिपोर्ट के अनुसार, “हमारे दौरे का उद्देश्य परियोजना सुरंग स्थल के पास में स्थित जढोता गांव वासियों से आवासीय घरों और निजी / वन भूमि पर दरार के संबंध में साक्ष्य व राय जुटाना था.”

हिमाचल में चल रहे प्रोजेक्ट का लेकर काम करने वाली एक संस्था ने रिपोर्ट जारी कर रहा है कि गांव के लोग इससे डरकर घर छोड़ रहे हैं.

डरकर घर खाली कर रहे लोग 

फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य विवेक नेगी ने बताया की “हमारी टीम प्रभावित स्थल में 3 जनवरी की दोपहर में पहुंच गयी थीं. हमने देखा कि जढोता गांव की तलहटी में होली-चंबा सड़क के पास भूस्खलन की चपेट में आए अपने शेड को एक श्रमिक खाली कर रहा था. इसी के पास एक घर निर्माणाधीन था. ऊपर से पानी रिस रहा था और जमीन नीचे की ओर खिसकते, पत्थरों को लुढ़कते हुए देखा जा सकता था. भूस्खलन बढ़ने के कारण 4 जनवरी को एक और परिवार अपना घर खाली कर रहा था.”

राज्य में 56 फीसदी जल विद्युत परियोजनाएं खतरे में 

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के 2015 के एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि राज्य में, 56 फीसदी जलविद्युत परियोजनाएं भूस्खलन के गंभीर खतरे में हैं. इसलिए, योजना और प्रभाव आंकलन के समय पर किसी भी तरह की लापरवाही के विनाशकारी परिणाम होना तय है. जलविद्युत परियोजनाओं के लिए तैयार की गई पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट में अक्सर भूस्खलन होने की संभावनाओं, भूकंपीय मुद्दों या इलाके की आपदा संभावना के प्रभावों की अनदेखी करते हुए वास्तविक मूल्यांकन करने में विफल रही है.

गांव के लोगों का पुनर्वास कराए प्रशासन

बजोली-होली जल विद्युत परियोजना के मामले में भी, प्रभावित क्षेत्र भरमौर क्षेत्र GSI मैपिंग के अनुसार बहुत ही ज्यादा भूस्खलन संवेदनशीलता क्षेत्र के अंतर्गत आता है. एक ओर समुदाय को आजीविका और संसाधनों के लगातार नुकसान का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी तरफ ऐसे खतरों और जोखिमों के कारण होने वाला आघात उनकी स्थिति को और भी खराब कर देता है.

हिमधरा पर्यावरण समूह के उपकार सिंह का कहना है की “परियोजना अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और सुरक्षा उपाय शुरू करने के अलावा, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जढोता के लोगों को पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेज के सभी फायदे तुरंत दिए.”

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हिमाचल प्रदेश
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Tags: Chamba news, Himachal pradesh



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