Bihar Corona Pandemic: बिहार में न टेस्ट, न बेड और न ऑक्सीजन; गहराता जा रहा है कोरोना संकट | No COVID-19 test, No Bed and Oxygen, situation in Bihar is getting worse due to Corona | – News in Hindi

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27 और 28 अप्रैल, 2021 को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने कोरोना महामारी के दौरान बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दो महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी. पहली यह कि 22 अप्रैल से 27 अप्रैल के बीच राज्य सरकार कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए एक बेड भी नहीं बढ़ा पाई है. दूसरी यह कि बेडों की संख्या तभी बढ़ सकती है, जब इन बेड्स पर ऑक्सीजन की उपलब्धता हो. मगर इस बीच न ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ी और न ऑक्सीजन बेड की संख्या. जबकि केंद्र सरकार द्वारा 22 अप्रैल से ही 194 एमटी लिक्विड ऑक्सीजन रोजाना का कोटा उपलब्ध कराया जा रहा है और दो मई, 2021 को इसे बढ़ाकर 214 एमटी कर दिया है.

इस खबर की चर्चा हर जगह जरूर है, मगर बिहार के अस्पतालों में अभी भी ऑक्सीजन की घनघोर किल्लत है और लोग ऑक्सीजन की कमी से बेहाल हैं, क्योंकि बिहार सरकार अपने कोटे में से 90-100 एमटी लिक्विड ऑक्सीजन का ही उठाव कर पा रही है. सरकार के पास ऑक्सीजन उठाव के लिए पर्याप्त वाहन नहीं हैं. महज दो दिन पहले सरकार के पटना हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि राज्य के तीन बड़े अस्पतालों के 1000 से अधिक बेड ऑक्सीजन न होने की वजह से खाली हैं.

अलॉटमेंट के बाद नहीं मिल रहा ऑक्सीजन
बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर पटना हाईकोर्ट की इन टिप्पणियों से जाहिर है कि कोरोना संक्रमण के इस भीषण दौर में लोगों को संकट से उबारने के लिए बिहार सरकार नाकाम रही है. सरकार न तो मरीजों के लिए बेड बढ़ा पा रही है और न ही अलॉटमेंट के बावजूद गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन का इंतजाम कर पा रही है. इस वजह से आज भी राज्य के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंच कर मरीज एंबुलेंस में दम तोड़ रहे हैं और ऑक्सीजन के अभाव में अस्पताल उन्हें भर्ती लेने के लिए तैयार नहीं हैं. यह एक ‘नॉन पर्फार्मिंग स्टेट’ का जीता जागता उदाहरण है, जो उपलब्ध संसाधनों को भी अपनी पीड़ित जनता तक नहीं पहुंचा पा रहा, क्योंकि उसकी मशीनरी इसे समय से अंजाम देने में अक्षम है.

इस बीच बिहार में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर एक लाख के पार चली गई है और खुद बिहार सरकार ने कबूल किया है कि यह संख्या तीन लाख तक जा सकती है. 28 अप्रैल को ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आदेश जारी किया कि स्वास्थ्य विभाग तीन लाख सक्रिय मरीजों के हिसाब से अपनी तैयारी करे. अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर आदि की व्यवस्था करे. साथ ही यह भी कहा गया कि इस हिसाब से सरकारी अस्पतालों में खाली पड़े पदों की भर्ती भी करे. मगर ये आदेश और घोषणाएं कागजी ही लग रहे हैं क्योंकि अगर सरकार कुछ भी कर पाने में सक्षम होती तो पिछले दस दिनों में कुछ तो बदलाव नजर आता. मगर परिस्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं.

स्वास्थ्य विभाग का हाल और बुरा
राज्य में आरटीपीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने में आठ से दस दिन का वक्त लग जा रहा है. इस बीच या तो मरीज ठीक हो जाता है या उनकी स्थिति खराब हो जाती है. स्वास्थ्य विभाग में मैनपावर की कमी जस की तस है. वह 2019 के चमकी बुखार के वक्त से ऐसी ही है. इस वक्त एंबुलेंस और ऑक्सीजन सिलिंडर के नाम पर मरीज लगातार लुट रहे हैं. कई गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है. राज्य सरकार ने कुछ हेल्पलाइन नंबर जरूर जारी किए हैं, मगर वे नंबर या तो लगते नहीं हैं या उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती. पिछले एक पखवाड़े से सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही हैं, मगर उन पर अमल नहीं हो रहा.पहले कहा गया कि बिहटा के ईएसआईसी अस्पताल में 500 बेड की व्यवस्था होगी, मगर आज 100 बेड के साथ यहां पर मरीजों का इलाज शुरू हुआ. फिर पीपीपी मॉडल पर चल रहे मेदांता होस्पीटल को शुरू करने की घोषणा हुई, वह भी नहीं हुआ. उसके बारे में कहा जा रहा है कि वह 10 मई से पहले नहीं हो पाएगा. इस बीच आईजीआईएमएस को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने की घोषणा हुई है, मगर वहां का प्रबंधन भी ऑक्सीजन की कमी बता रहा है, अब तक वहां बमुश्किल 36 बेड ही बढ़े हैं. पाटलीपुत्रा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को कोविड अस्पताल बनाने, सात मेडिकल कॉलेजों को कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाने और हर जिले में 500 बेड की व्यवस्था करने की भी घोषणाएं मीडिया में हैं. मगर इसका जरा भी लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा, क्योंकि ये घोषणाएं ठीक से जमीन पर उतर ही नहीं पा रहीं.

30 अप्रैल तक 45000 बेड का दावा, मगर 1731 उपलब्ध
राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि उसे 30 अप्रैल तक 45 हजार बेड की व्यवस्था करना है, जिसमें 15 हजार ऑक्सीजन युक्त आईसीयू बेड होंगे. मगर हकीकत यही है कि राज्य में 29 अप्रैल तक सिर्फ 1731 आईसीयू बेड कोविड मरीजों के लिए थे. उनमें से भी 654 ऑक्सीजन की अनुपलब्धता की वजह से खाली थे. 28 अप्रैल की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को इस बात के लिए कड़ी फटकार लगाई है और कहा है कि जल्द से जल्द केंद्र द्वारा आवंटित 194 एमटी ऑक्सीजन का उठाव करे और इसे अस्पतालों तक पहुंचाए, ताकि राज्य में ऑक्सीजन युक्त बेड की संख्या बढ़ सके. इसके अलावा कोर्ट ने समय से आरटीपीसीआर टेस्ट के नतीजे उपलब्ध कराने की भी बात कही है. टेस्ट के बारे में सरकार ने कहा है कि राज्य में सिर्फ 19 आरटीपीसीआर मशीनें उपलब्ध हैं, इस वजह से दिक्कत हो रही है.

सुनवाई के दौरान मैनपावर का भी सवाल उठा. सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में 91,921 पद सृजित हैं, जिनमें से आधे से अधिक यानी 46,256 पद खाली पड़े हैं. इनमें से सामान्य चिकित्सकों के 3206 और विशेषज्ञ चिकित्सकों के 4149 पद खाली हैं. यानी डॉक्टरों के कुल 7355 पद खाली हैं. दिलचस्प है कि पिछले साल इसी वक्त राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट को बताया था कि राज्य में डॉक्टरों के 11,645 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 8768 पद खाली हैं. इसका मतलब साफ है कि कोरोना महामारी के बावजूद पिछले एक साल में राज्य सरकार सिर्फ 1413 डॉक्टरों की बहाली कर पाई है.

डॉक्टरों की बहाली होते-होते आ जाएगा जून
इतनी फजीहत के बाद राज्य सरकार ने डॉक्टरों के खाली पदों पर नियुक्ति के लिए 28 अप्रैल, 2021 को विज्ञापन निकाला है. 6338 पदों के लिए निकाले गए इस विज्ञापन में आवेदन की तिथि 10 मई से 24 मई तक रखी गई है. इसके साथ-साथ 1000 चिकित्सकों को ठेके पर बहाल करने के लिए इंटरव्यू का भी आयोजन किया जा रहा है, मगर वह भी 10 मई को होगा. अगर सरकार बहुत जल्द भी करती है, तो नियुक्ति होते होते कम से कम जून का महीना आ जाएगा. मतलब साफ है, यह भी हेडसाइन मैनेजमेंट के जरिये लोगों के गुस्से को कम करने की कोशिश ही है.

इस बीच राज्य स्वास्थ्य समिति की तरफ से यह जानकारी मिली है कि राज्य के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में 200 से अधिक वेंटीलेटर बेकार पड़े हैं. इन्हें न इंस्टॉल किया जा सका है और न ही इन्हें चलाने वाले प्रशिक्षित लोग हैं. अब इन्हें प्राइवेट अस्पतालों को सौंपने की तैयारी है.

कुल मिलाकर बिहार सरकार एक पखवाड़े से वहीं की वहीं है. कोरोना का संकट बढ़ रहा है, मगर न बेड बढ़े, न जांच की सुविधा बेहतर हुई, न ऑक्सीजन का संकट दूर हुआ और न मैनपावर का कोई इंतजाम हुआ. सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही हैं, ताकि जनता को उसके काम करते रहने का एहसास बना रहे. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)

ब्लॉगर के बारे में

पुष्यमित्रलेखक एवं पत्रकार

स्वतंत्र पत्रकार व लेखक. विभिन्न अखबारों में 15 साल काम किया है. ‘रुकतापुर’ समेत कई किताबें लिख चुके हैं. समाज, राजनीति और संस्कृति पर पढ़ने-लिखने में रुचि.

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